❛"सुनना" सीख लीजिये तो "सहना" भी सीख जाओगे और सहना सीख लिया तो "रहना" भी सीख जाओगे❜
” जिस इंसान ने कभी ग़लती नहीं की उसने.. कभी कुछ नया करने की कोशिश ही नहीं की।“
पत्तों सी होती है कई रिश्तों की उम्र...! आज हरे...........कल सूखे क्यों न हम जड़ों से रिश्ते निभाना सीखें...
जिंदगी उसके साथ बिताओ जिसके साथ बेखौफ होकर एक छोटे बच्चे की तरह हंस सको
"उपलब्धि" और "आलोचना" एक दूसरे के मित्र हैं !! उपलब्धियां बढ़ेगी तो निश्चित ही आपकी आलोचना भी बढ़ेगी
इंसान की बुद्धिमानी उसके चेहरे या कपड़ो से नही होती बल्कि उसकी आदतों और बातचीत करने के तरीके से झलकती है
❛"सुनना" सीख लीजिये तो "सहना" भी सीख जाओगे और सहना सीख लिया तो "रहना" भी सीख जाओगे❜
” जिस इंसान ने कभी ग़लती नहीं की उसने.. कभी कुछ नया करने की कोशिश ही नहीं की।“
पत्तों सी होती है कई रिश्तों की उम्र...! आज हरे...........कल सूखे क्यों न हम जड़ों से रिश्ते निभाना सीखें...
जिंदगी उसके साथ बिताओ जिसके साथ बेखौफ होकर एक छोटे बच्चे की तरह हंस सको
"उपलब्धि" और "आलोचना" एक दूसरे के मित्र हैं !! उपलब्धियां बढ़ेगी तो निश्चित ही आपकी आलोचना भी बढ़ेगी
इंसान की बुद्धिमानी उसके चेहरे या कपड़ो से नही होती बल्कि उसकी आदतों और बातचीत करने के तरीके से झलकती है