पहले निश्चय करिएँ, फिर कार्य आरम्भ करें।
अगर आप अपना पैसा गिन सकते हो तो आपको निश्चय ही और ज्यादा मेहनत करने की जरूरत है
खुशी का पहला उपाय पिछली बातों पर बहुत अधिक विचार करने से बचें
इच्छाओं का भी अपना चरित्र होता है... खुद के मन की हो तो बहुत अच्छी लगती हैं दूसरों के मन की हो तो बहुत खटकती है
कोई कितना भी झूठा और कपटी हो आपके साथ आप तब भी सच्चे बने रहिए क्योंकि किसी बीमार को देखकर स्वयं को बीमार कर लेना ये समझदारी नही मूर्खता है..
संभाल कर रखी हुई चीज और ध्यान से सुनी हुई बात, कभी न कभी काम आ ही जाती है
पहले निश्चय करिएँ, फिर कार्य आरम्भ करें।
अगर आप अपना पैसा गिन सकते हो तो आपको निश्चय ही और ज्यादा मेहनत करने की जरूरत है
खुशी का पहला उपाय पिछली बातों पर बहुत अधिक विचार करने से बचें
इच्छाओं का भी अपना चरित्र होता है... खुद के मन की हो तो बहुत अच्छी लगती हैं दूसरों के मन की हो तो बहुत खटकती है
कोई कितना भी झूठा और कपटी हो आपके साथ आप तब भी सच्चे बने रहिए क्योंकि किसी बीमार को देखकर स्वयं को बीमार कर लेना ये समझदारी नही मूर्खता है..
संभाल कर रखी हुई चीज और ध्यान से सुनी हुई बात, कभी न कभी काम आ ही जाती है