कोई तब तक आपकी सवारी नहीं कर सकता जब तक आपकी पीठ झुकी ना हो

कोई तब तक आपकी सवारी नहीं कर सकता जब तक आपकी पीठ झुकी ना हो

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हमेशा खुश रहा करो ये सोच कर की दुनिया मे हमशे भी ज्यादा परेशान ओर भी लोग है

अभी से वो होना शुरू कीजिये जो आप भविष्य में होंगे

कभी ना कहो की दिन अपने ख़राब है। समझ लो की हम काँटों से घिर गए गुलाब है।।

इंसान का व्यक्तित्व तभी उभर के आता है जब वो अपनो से ठोकर खाता है...

जो आपके शब्दों का "मूल्य" नहीं समझता उसके सामने मौन रहना ही बेहतर है.

उम्मीद हमे कभी भी छोड़ कर नहीं जाती बस हम ही उसे छोड़ देते है

हमेशा खुश रहा करो ये सोच कर की दुनिया मे हमशे भी ज्यादा परेशान ओर भी लोग है

अभी से वो होना शुरू कीजिये जो आप भविष्य में होंगे

कभी ना कहो की दिन अपने ख़राब है। समझ लो की हम काँटों से घिर गए गुलाब है।।

इंसान का व्यक्तित्व तभी उभर के आता है जब वो अपनो से ठोकर खाता है...

जो आपके शब्दों का "मूल्य" नहीं समझता उसके सामने मौन रहना ही बेहतर है.

उम्मीद हमे कभी भी छोड़ कर नहीं जाती बस हम ही उसे छोड़ देते है