शब्द यात्रा करते हैं... इसलिए पीठ पीछे भी, किसी की निंदा न करें
तब तक कमाओ जब तक महँगी चीज़ सस्ती ना लगने लगे चाहे वो सम्मान हो या सामान..
चीजें खुद नहीं होतीं, उन्हें करना पड़ता है
पहले जैसा रंग नही अब जीवन की रंगोली में ना जाने कितना ज़हर भरा है लोगो की बोली में
अगर तुम्हें किसी काम के लिए खुद से ज्यादा किसी ओर का MOTIVATION चाहिए तो PLEASE भाई वो काम मत करो
बादशाह सिर्फ वक्त होता है, इन्सान तो यूँ ही गुरुर करता है
शब्द यात्रा करते हैं... इसलिए पीठ पीछे भी, किसी की निंदा न करें
तब तक कमाओ जब तक महँगी चीज़ सस्ती ना लगने लगे चाहे वो सम्मान हो या सामान..
चीजें खुद नहीं होतीं, उन्हें करना पड़ता है
पहले जैसा रंग नही अब जीवन की रंगोली में ना जाने कितना ज़हर भरा है लोगो की बोली में
अगर तुम्हें किसी काम के लिए खुद से ज्यादा किसी ओर का MOTIVATION चाहिए तो PLEASE भाई वो काम मत करो
बादशाह सिर्फ वक्त होता है, इन्सान तो यूँ ही गुरुर करता है