चिंतन सदैव अकेले में किया जाए, ताकि विचार भंग होने की संभावना न रहे . पढाई में दो, गायन में तीन, यात्रा में चार और खेती में पाँच व्यक्तियों का साथ उत्तम माना गया है. इसी प्रकार युद्ध में अधिक संख्या बल का महत्व बढ़ जाता है.
इच्छाओं का भी अपना चरित्र होता है... खुद के मन की हो तो बहुत अच्छी लगती हैं दूसरों के मन की हो तो बहुत खटकती है
आपके सामने जो दूसरों की बुराई करता है उससे यह उम्मीद मत रखिए कि वह दूसरों के सामने आपकी तारीफ करेगा
यदि गुलाब की तरह खिलना चाहते है तो काँटों के साथ तालमेल की कला सीखनी होगी!
भगवान से निराश कभी मत होना, संसार से आशा कभी मत करना
जो कभी उद्यंडका-सा वेष नहीं बनाता, दूसरों के सामने अपने पराक्रम की डींग नही हांकता, क्रोध से व्याकुल होने पर भी कटुवचन नहीं बोलता, उस मनुष्य को लोग सदा ही प्यारा बना लेते हैं।
चिंतन सदैव अकेले में किया जाए, ताकि विचार भंग होने की संभावना न रहे . पढाई में दो, गायन में तीन, यात्रा में चार और खेती में पाँच व्यक्तियों का साथ उत्तम माना गया है. इसी प्रकार युद्ध में अधिक संख्या बल का महत्व बढ़ जाता है.
इच्छाओं का भी अपना चरित्र होता है... खुद के मन की हो तो बहुत अच्छी लगती हैं दूसरों के मन की हो तो बहुत खटकती है
आपके सामने जो दूसरों की बुराई करता है उससे यह उम्मीद मत रखिए कि वह दूसरों के सामने आपकी तारीफ करेगा
यदि गुलाब की तरह खिलना चाहते है तो काँटों के साथ तालमेल की कला सीखनी होगी!
भगवान से निराश कभी मत होना, संसार से आशा कभी मत करना
जो कभी उद्यंडका-सा वेष नहीं बनाता, दूसरों के सामने अपने पराक्रम की डींग नही हांकता, क्रोध से व्याकुल होने पर भी कटुवचन नहीं बोलता, उस मनुष्य को लोग सदा ही प्यारा बना लेते हैं।