हर सुबह इस यकीन के साथ उठो कि मेरा आज बीते हुए कल से बेहतर होगा
लंबी छलांगों से कही बेहतर है निरंतर बढ़ते कदम... जी एक दिन आपको मंजिल तक ले जाएंगे
इंसान को अलार्म नही, जिम्मेदारियां जगाती है
लगातार हो रही असफलताओ से निराश नही होना चाहिए क्योक़ि कभी-कभी गुच्छे की आखिरी चाबी भी ताला खोल देती है।
सफल होने के बाद भी आप खुद को उस व्यक्ति से बड़ा ना समझे जिसके हाथों को पकड़ कर आपने सफलता की सीढ़ी चढ़ी
जब अपने ही परिंदे किसी और के दाने के आदी हो जाए तो उन्हें आजाद कर देना चाहिए
हर सुबह इस यकीन के साथ उठो कि मेरा आज बीते हुए कल से बेहतर होगा
लंबी छलांगों से कही बेहतर है निरंतर बढ़ते कदम... जी एक दिन आपको मंजिल तक ले जाएंगे
इंसान को अलार्म नही, जिम्मेदारियां जगाती है
लगातार हो रही असफलताओ से निराश नही होना चाहिए क्योक़ि कभी-कभी गुच्छे की आखिरी चाबी भी ताला खोल देती है।
सफल होने के बाद भी आप खुद को उस व्यक्ति से बड़ा ना समझे जिसके हाथों को पकड़ कर आपने सफलता की सीढ़ी चढ़ी
जब अपने ही परिंदे किसी और के दाने के आदी हो जाए तो उन्हें आजाद कर देना चाहिए