सब्र एक ऐसी सवारी है, जो अपने सवार को कभी गिरने नहीं देती, ना किसी के कदमों में, ना किसी के नजरों में
इंसान सफल तब होता है जब वो जरूरत और चाहत के बीच फर्क समझ लेता है
आपकी दिन की पहली विफलता तब शूरू होती हैं जब आप पाँच मिनट के लिए औऱ सोने का फैसला लेते हैं
प्रतिदिन हमें कुछ न कुछ नया ग्रहण करना चाहिए, फिर चाहे वह एक श्लोक, उसका एक अंश अथवा एक शब्द मात्र ही क्यों न हो. एक-एक शब्द ही एक दिन विशाल समुद्र का रूप धारण कर लेता है.
मुश्किल वक़्त में किसी का सहारा बनो सलाहकार नही
गलतियाँ ढूँढना गलत नही है...!! बस शुरुआत खुद से होनी चाहिए...!!!
सब्र एक ऐसी सवारी है, जो अपने सवार को कभी गिरने नहीं देती, ना किसी के कदमों में, ना किसी के नजरों में
इंसान सफल तब होता है जब वो जरूरत और चाहत के बीच फर्क समझ लेता है
आपकी दिन की पहली विफलता तब शूरू होती हैं जब आप पाँच मिनट के लिए औऱ सोने का फैसला लेते हैं
प्रतिदिन हमें कुछ न कुछ नया ग्रहण करना चाहिए, फिर चाहे वह एक श्लोक, उसका एक अंश अथवा एक शब्द मात्र ही क्यों न हो. एक-एक शब्द ही एक दिन विशाल समुद्र का रूप धारण कर लेता है.
मुश्किल वक़्त में किसी का सहारा बनो सलाहकार नही
गलतियाँ ढूँढना गलत नही है...!! बस शुरुआत खुद से होनी चाहिए...!!!