इंसान का व्यक्तित्व तब ही उभर के आता है जब वो अपनो से ठोकर खाता है
स्मार्ट बनो क्योंकि कोई भी आपका रिजल्ट देखता है मेहनत नही
ख़ुद की जिम्मेवारी और काम को सौंप बड़े गुमान से बैठा है, ख़ुदा ने जबसे माँ बनाई है खुद इत्मिनान से बैठा है।
देर से बनो मगर जरूर कुछ बनो क्योकि वक़्त के साथ लोग खेरियत नहीं हैसियत पूछते है
कर्म सुख भले ही न ला सके, परंतु कर्म के बिना सुख नहीं मिलता
जब रिश्तों में झूठ बोलने की आवश्यकता महसूस होने लगे, तब समझ लेना चाहिए कि रिश्ता समाप्ति की ओर है।
इंसान का व्यक्तित्व तब ही उभर के आता है जब वो अपनो से ठोकर खाता है
स्मार्ट बनो क्योंकि कोई भी आपका रिजल्ट देखता है मेहनत नही
ख़ुद की जिम्मेवारी और काम को सौंप बड़े गुमान से बैठा है, ख़ुदा ने जबसे माँ बनाई है खुद इत्मिनान से बैठा है।
देर से बनो मगर जरूर कुछ बनो क्योकि वक़्त के साथ लोग खेरियत नहीं हैसियत पूछते है
कर्म सुख भले ही न ला सके, परंतु कर्म के बिना सुख नहीं मिलता
जब रिश्तों में झूठ बोलने की आवश्यकता महसूस होने लगे, तब समझ लेना चाहिए कि रिश्ता समाप्ति की ओर है।