मुमकिन नहीं.., हर "वक्त" मेहरबां रहे जिंदगी! कुछ "लम्हें" .. जीने का तजुर्बा भी सिखाते है.
रोना बंद करो और अपनी तकलीफों से खुद लड़ना सीखो क्योंकि साथ देने वाले भी शमशान से आगे नही जाते..
अभी से वो होना शुरू कीजिये जो आप भविष्य में होंगे
अगर कोई पसंद आ जाए तो दूसरों से नहीं पूछना चाहिए वो कैसा है
पहले निश्चय करिएँ, फिर कार्य आरम्भ करें।
ज़िन्दगी बहुत हसीन है, कभी हंसाती है, तो कभी रुलाती है, लेकिन जो ज़िन्दगी की भीड़ में खुश रहता है, ज़िन्दगी उसी के आगे सिर झुकाती है।
मुमकिन नहीं.., हर "वक्त" मेहरबां रहे जिंदगी! कुछ "लम्हें" .. जीने का तजुर्बा भी सिखाते है.
रोना बंद करो और अपनी तकलीफों से खुद लड़ना सीखो क्योंकि साथ देने वाले भी शमशान से आगे नही जाते..
अभी से वो होना शुरू कीजिये जो आप भविष्य में होंगे
अगर कोई पसंद आ जाए तो दूसरों से नहीं पूछना चाहिए वो कैसा है
पहले निश्चय करिएँ, फिर कार्य आरम्भ करें।
ज़िन्दगी बहुत हसीन है, कभी हंसाती है, तो कभी रुलाती है, लेकिन जो ज़िन्दगी की भीड़ में खुश रहता है, ज़िन्दगी उसी के आगे सिर झुकाती है।