ज़िन्दगी में जब तक भागते भागते काम करो जब तक सोते सोते पैसा आना शुरू न हो जाये

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पत्थर की कीमत जब समझ में आती है सुनसान सड़क पर जब कुत्ते घेर लेते है

मनुष्य रूप, यौवन और मदिरा में खोकर अपने आप को ही भूल जाता है, लेकिन जब उसे होश आता है तो नरक का द्वार उसके सामने होता है. अर्थात सूरा-सुंदरी का सुख मनुष्य को नरक के अतिरिक्त कुछ नहीं दे सकता. इससे बचना ही श्रेयस्कर है.

इंसान नहीं, उसकी सफलता बोलती है जब असफलता होती है तब इंसान लाख बोले उसकी कोई नहीं सुनता

अगर आपको ख्याल आये की आप बहुत बुरे हो; तो यकीन मानो अगर आप सच मे बुरे होते तो आपको ये ख्याल ही नही आता

कर्म भूमि की दुनिया में श्रम सभी को करना है, भगवान सिर्फ लकीरें देता है, रंग हमें ही भरना है

दुनिया उन्हीं की खैरियत पूछती है जो पहले से ही खुश हों, जो तकलीफ में होते हैं उनके तो नंबर तक खो जाते है।

पत्थर की कीमत जब समझ में आती है सुनसान सड़क पर जब कुत्ते घेर लेते है

मनुष्य रूप, यौवन और मदिरा में खोकर अपने आप को ही भूल जाता है, लेकिन जब उसे होश आता है तो नरक का द्वार उसके सामने होता है. अर्थात सूरा-सुंदरी का सुख मनुष्य को नरक के अतिरिक्त कुछ नहीं दे सकता. इससे बचना ही श्रेयस्कर है.

इंसान नहीं, उसकी सफलता बोलती है जब असफलता होती है तब इंसान लाख बोले उसकी कोई नहीं सुनता

अगर आपको ख्याल आये की आप बहुत बुरे हो; तो यकीन मानो अगर आप सच मे बुरे होते तो आपको ये ख्याल ही नही आता

कर्म भूमि की दुनिया में श्रम सभी को करना है, भगवान सिर्फ लकीरें देता है, रंग हमें ही भरना है

दुनिया उन्हीं की खैरियत पूछती है जो पहले से ही खुश हों, जो तकलीफ में होते हैं उनके तो नंबर तक खो जाते है।