किसी को परेशान देखकर अगर हमें तकलीफ होती हैं तो यकीन मानिए ईश्वर ने हमें इंसान बनाकर कोई गलती नहीं की है
“अहंकार” और “संस्कार” में फ़र्क़ है… “अहंकार” दूसरों को झुकाकर खुश होता है, “संस्कार” स्वयं झुककर खुश होता है..!
इंसान की तरह बोलना न आये तो जानवर की तरह मौन रहना अच्छा है।
सत्य कड़वा नहीं होता (जनाब,) तुम सिर्फ झूठ के स्वाद से वाकिफ़ हो।
भरोशा करो लेकिन किसी के भरोशे मत रहो ।
प्यार की डोर सजाये रखो, दिल को दिल से मिलाये रखो, क्या लेकर जाना है साथ मे इस दुनिया से, मीठे बोल और अच्छे व्यवहार से रिश्तों को बनाए रखो
किसी को परेशान देखकर अगर हमें तकलीफ होती हैं तो यकीन मानिए ईश्वर ने हमें इंसान बनाकर कोई गलती नहीं की है
“अहंकार” और “संस्कार” में फ़र्क़ है… “अहंकार” दूसरों को झुकाकर खुश होता है, “संस्कार” स्वयं झुककर खुश होता है..!
इंसान की तरह बोलना न आये तो जानवर की तरह मौन रहना अच्छा है।
सत्य कड़वा नहीं होता (जनाब,) तुम सिर्फ झूठ के स्वाद से वाकिफ़ हो।
भरोशा करो लेकिन किसी के भरोशे मत रहो ।
प्यार की डोर सजाये रखो, दिल को दिल से मिलाये रखो, क्या लेकर जाना है साथ मे इस दुनिया से, मीठे बोल और अच्छे व्यवहार से रिश्तों को बनाए रखो