समय और भाग्य दोनों ही परिवर्तनशील है इन पर किसी को अहंकार नही करना चाहिए

समय और भाग्य दोनों ही परिवर्तनशील है इन पर किसी को अहंकार नही करना चाहिए

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पिता, माता अग्नि, आत्मा और गुरु – मनुष्य को इन पांच अग्नियों की बड़े यत्न से सेवा करनी चाहिए।

हर प्रशंसा करने वाला आपका शुभचिंतक नही होता

लोगो की बातों पे गौर करना, वो बातों से अच्छा चाहते है इरादों से नही

मन में उतरना और मन से उतरना केवल आपके व्यवहार पर निर्भर करता है

संभालना ही है तो रिश्ते संभालो तस्वीरे तो हर कोई संभाल के रखता है

तब तक मेहनत करते रहो जब तक आपको अपना परिचय खुद किसी को देने की जरूरत ना पड़े

पिता, माता अग्नि, आत्मा और गुरु – मनुष्य को इन पांच अग्नियों की बड़े यत्न से सेवा करनी चाहिए।

हर प्रशंसा करने वाला आपका शुभचिंतक नही होता

लोगो की बातों पे गौर करना, वो बातों से अच्छा चाहते है इरादों से नही

मन में उतरना और मन से उतरना केवल आपके व्यवहार पर निर्भर करता है

संभालना ही है तो रिश्ते संभालो तस्वीरे तो हर कोई संभाल के रखता है

तब तक मेहनत करते रहो जब तक आपको अपना परिचय खुद किसी को देने की जरूरत ना पड़े