"निर्मल" रहिए... वरना
अपनी तुलना दुसरो से ना करे, हर फल का स्वाद अलग अलग होता है
हर इंसान के अंदर अच्छाई हर इंसान के अंदर अच्छाई ओर बुराई के बीच एक जंग चलती रहती है।
वक़्त बदलते देर नही लगती इसलिए कभी भी हद से ज्यादा फूलों मत और अपनों को कभी भूलो मत
भीड़ हमेशा उस रास्ते पर चलती है जो रास्ता आसान लगता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं की भीड़ हमेशा सही रास्ते पर चलती है। अपने रास्ते खुद चुनिए क्योंकि आपको आपसे बेहतर और कोई नहीं जानता
रिश्तो में झुकना कोई अजीब बात नही, सूरज भी तो ढल जाता है चाँद के लिए.
"निर्मल" रहिए... वरना
अपनी तुलना दुसरो से ना करे, हर फल का स्वाद अलग अलग होता है
हर इंसान के अंदर अच्छाई हर इंसान के अंदर अच्छाई ओर बुराई के बीच एक जंग चलती रहती है।
वक़्त बदलते देर नही लगती इसलिए कभी भी हद से ज्यादा फूलों मत और अपनों को कभी भूलो मत
भीड़ हमेशा उस रास्ते पर चलती है जो रास्ता आसान लगता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं की भीड़ हमेशा सही रास्ते पर चलती है। अपने रास्ते खुद चुनिए क्योंकि आपको आपसे बेहतर और कोई नहीं जानता
रिश्तो में झुकना कोई अजीब बात नही, सूरज भी तो ढल जाता है चाँद के लिए.