साधुजन के दर्शन से पुण्य प्राप्त होता है. साधु तीर्थों के समान होते हैं, तीर्थों का फल तो कुछ समय बाद मिलता है, किन्तु साधु समागम तुरंत फल देता है’
. जितना ज्यादा दूर से देखोगे लोग उतने ज्यादा अच्छे लगेंगे
बुढ़ापे में आपको रोटी आपकी औलाद नहीं आपके दिए संस्कार खिलाएंगे
जब जिंदगी में कुछ बड़ा करने की कोशिश करोगे तब , ना कोई ध्यान देगा ना कोई साथ देगा
खुद को आप इतना बेहतर बनाएं कि जो कल आप थे,वह आज ना रहें...
मन खुश है तो,, एक बूँद भी बरसात है.. दुखी मन के आगे,, समंदर की क्या औकात है
साधुजन के दर्शन से पुण्य प्राप्त होता है. साधु तीर्थों के समान होते हैं, तीर्थों का फल तो कुछ समय बाद मिलता है, किन्तु साधु समागम तुरंत फल देता है’
. जितना ज्यादा दूर से देखोगे लोग उतने ज्यादा अच्छे लगेंगे
बुढ़ापे में आपको रोटी आपकी औलाद नहीं आपके दिए संस्कार खिलाएंगे
जब जिंदगी में कुछ बड़ा करने की कोशिश करोगे तब , ना कोई ध्यान देगा ना कोई साथ देगा
खुद को आप इतना बेहतर बनाएं कि जो कल आप थे,वह आज ना रहें...
मन खुश है तो,, एक बूँद भी बरसात है.. दुखी मन के आगे,, समंदर की क्या औकात है