यदि आपको किसी एक से शिकायत है तो उससे बात कीजिये लेकिन अगर आपको अधिकतर लोगों से शिकायत है तो खुद से बात कीजिये
चिंता उतनी करो की काम हो जाये..इतनी नही की ज़िन्दगी तमाम हो जाये
कठिन समय के लिए धन की रक्षा करनी चाहिए।
तकदीर ऐसे ही नहीं बदलती, पहले अपनी सोच को बदलना पड़ता है .
"सार्वजनिक" रूप से की गई "आलोचना" अपमान में बदल जाती है और .... "एकांत" में बताने पर "सलाह" बन जाती है...!!
यदि गुलाब की तरह खिलना चाहते है तो काँटों के साथ तालमेल की कला सीखनी होगी!
यदि आपको किसी एक से शिकायत है तो उससे बात कीजिये लेकिन अगर आपको अधिकतर लोगों से शिकायत है तो खुद से बात कीजिये
चिंता उतनी करो की काम हो जाये..इतनी नही की ज़िन्दगी तमाम हो जाये
कठिन समय के लिए धन की रक्षा करनी चाहिए।
तकदीर ऐसे ही नहीं बदलती, पहले अपनी सोच को बदलना पड़ता है .
"सार्वजनिक" रूप से की गई "आलोचना" अपमान में बदल जाती है और .... "एकांत" में बताने पर "सलाह" बन जाती है...!!
यदि गुलाब की तरह खिलना चाहते है तो काँटों के साथ तालमेल की कला सीखनी होगी!