इंसान का व्यक्तित्व तभी उभर के आता है जब वो अपनो से ठोकर खाता है...
"लगन" एक छोटा सा शब्द है लेकिन जिसे लग जाती है उसका जीवन बदल देती है
जिसने खर्च कम करने की बात सोची समझ लो उसने कमाने की अकल खो दी....
अपनी नजर हमेशा उस चीज पर रखो जिसे तुम पाना चाहते हो.. उस पर नही जिसे तुम खो चुके हो
जीवन की परीक्षा में,कोई अंक नहीं मिलते हैं पर, लोग आपको हृदय से स्मरण करें तो, समझ लेना आप उतीर्ण हो गय
"जीवन" में "पीछे" देखो "अनुभव" मिलेगा "जीवन में "आगे" देखो तो "आशा" मिलेगी "दायें" "बायें" देखो तो "सत्य" मिलेगा "स्वयं" के "अंदर" देखो तो "परमात्मा" और "आत्मविश्वास" मिलेगा..
इंसान का व्यक्तित्व तभी उभर के आता है जब वो अपनो से ठोकर खाता है...
"लगन" एक छोटा सा शब्द है लेकिन जिसे लग जाती है उसका जीवन बदल देती है
जिसने खर्च कम करने की बात सोची समझ लो उसने कमाने की अकल खो दी....
अपनी नजर हमेशा उस चीज पर रखो जिसे तुम पाना चाहते हो.. उस पर नही जिसे तुम खो चुके हो
जीवन की परीक्षा में,कोई अंक नहीं मिलते हैं पर, लोग आपको हृदय से स्मरण करें तो, समझ लेना आप उतीर्ण हो गय
"जीवन" में "पीछे" देखो "अनुभव" मिलेगा "जीवन में "आगे" देखो तो "आशा" मिलेगी "दायें" "बायें" देखो तो "सत्य" मिलेगा "स्वयं" के "अंदर" देखो तो "परमात्मा" और "आत्मविश्वास" मिलेगा..