कुछ पाने के लिए कुछ खोना नहीं..कुछ करना पड़ता है

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जीवन तब सबसे ज्यादा सुहाना लगने लगता है जब हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेते है

सत्य भी यदि अनुचित है तो उसे नहीं कहना चाहिए।

आप अपनी गलतियों से तभी सीख सकते हैं , जब आप अपनी गलतियों को स्वीकार करते हैं

देश में "राजा" समाज में "गुरु" परिवार में "पिता" घर में "स्त्री" ये कभी "साधारण" नहीं होते क्योंकि ~ निर्माण और प्रलय ~ इन्हीं के "हाथ" में होता है

अगर रास्ता खूबसूरत है तो पता कीजिये किस मंजिल की तरफ जाता है लेकिन अगर मंजिल खूबसूरत हो तो, कभी रास्ते की परवाह मत कीजिये !! मेहनत का फल और समस्या का हल देर से ही सही मिलता जरूर है!!

अगर "बुरे वक्त" में कोई आकर यह "कह" दे कि.. "चिंता मत करो" मैं तुम्हारे "साथ" हूँ! तो बस ये "शब्द" ही "व्यक्ति" के लिए "औषधि" बन जाते हैं ..!!

जीवन तब सबसे ज्यादा सुहाना लगने लगता है जब हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेते है

सत्य भी यदि अनुचित है तो उसे नहीं कहना चाहिए।

आप अपनी गलतियों से तभी सीख सकते हैं , जब आप अपनी गलतियों को स्वीकार करते हैं

देश में "राजा" समाज में "गुरु" परिवार में "पिता" घर में "स्त्री" ये कभी "साधारण" नहीं होते क्योंकि ~ निर्माण और प्रलय ~ इन्हीं के "हाथ" में होता है

अगर रास्ता खूबसूरत है तो पता कीजिये किस मंजिल की तरफ जाता है लेकिन अगर मंजिल खूबसूरत हो तो, कभी रास्ते की परवाह मत कीजिये !! मेहनत का फल और समस्या का हल देर से ही सही मिलता जरूर है!!

अगर "बुरे वक्त" में कोई आकर यह "कह" दे कि.. "चिंता मत करो" मैं तुम्हारे "साथ" हूँ! तो बस ये "शब्द" ही "व्यक्ति" के लिए "औषधि" बन जाते हैं ..!!