संभाल कर रखी हुई चीज और ध्यान से सुनी हुई बात, कभी न कभी काम आ ही जाती है
अच्छाई की शुरुवात खुद से ही करनी पड़ती है क्योंकि तिलक भी दूसरों को लगाने से पहले खुद की उँगली पर लगाना होता है
पीछे देखने पर अफसोस हो सकता है लेकिन आगे देखने पर हमेशा अवसर ही दिखाई देंगे
किसी के लिए समर्पण करना, मुश्किल नहीं है मुश्किल है उस व्यक्ति को ढूंढना जो आप के समर्पण की कद्र करे
कोशिश हमेशा आखरी साँस तक करनी चाहिए या तो लक्ष्य हासिल होगा या अनुभव
जो जिस कार्ये में कुशल हो उसे उसी कार्ये में लगना चाहिए।
संभाल कर रखी हुई चीज और ध्यान से सुनी हुई बात, कभी न कभी काम आ ही जाती है
अच्छाई की शुरुवात खुद से ही करनी पड़ती है क्योंकि तिलक भी दूसरों को लगाने से पहले खुद की उँगली पर लगाना होता है
पीछे देखने पर अफसोस हो सकता है लेकिन आगे देखने पर हमेशा अवसर ही दिखाई देंगे
किसी के लिए समर्पण करना, मुश्किल नहीं है मुश्किल है उस व्यक्ति को ढूंढना जो आप के समर्पण की कद्र करे
कोशिश हमेशा आखरी साँस तक करनी चाहिए या तो लक्ष्य हासिल होगा या अनुभव
जो जिस कार्ये में कुशल हो उसे उसी कार्ये में लगना चाहिए।