जो सच बोलता है, सबसे अधिक नफ़रत लोग उसी से करते हैं।
मित्रों से समागम, अधिक धन की प्राप्ति, पुत्र का आलिंगन, मैथुन में प्रवृत्ति, समय पर प्रिय वचन बोलना, अपने वर्ग के लोगों में उन्नति, अभीष्ट वस्तु की प्राप्ति और समाज में सम्मान – ये आठ हर्ष के सार दिखाई देते हैं और ये ही लौकिक सुख के साधन भी होते हैं।
कोई भी हमें सुख या दुख नही दे सकता , बल्कि हमारे सोचने का तरीका ही हमारे सुख व दुख का कारण होता है।✨
इंसान को यूँ ही मतलबी नहीं कहा जाता, उसे अपने सुख से ज्यादा दुसरे के दुःख में मज़ा आता है
शब्द यात्रा करते हैं इसलिए पीठ पीछे भी, किसी की निंदा न करें
धन से ज्ञान उत्तम है, क्योंकि धन की रक्षा करनी पड़ती है और ज्ञान हमारी रक्षा करता है
जो सच बोलता है, सबसे अधिक नफ़रत लोग उसी से करते हैं।
मित्रों से समागम, अधिक धन की प्राप्ति, पुत्र का आलिंगन, मैथुन में प्रवृत्ति, समय पर प्रिय वचन बोलना, अपने वर्ग के लोगों में उन्नति, अभीष्ट वस्तु की प्राप्ति और समाज में सम्मान – ये आठ हर्ष के सार दिखाई देते हैं और ये ही लौकिक सुख के साधन भी होते हैं।
कोई भी हमें सुख या दुख नही दे सकता , बल्कि हमारे सोचने का तरीका ही हमारे सुख व दुख का कारण होता है।✨
इंसान को यूँ ही मतलबी नहीं कहा जाता, उसे अपने सुख से ज्यादा दुसरे के दुःख में मज़ा आता है
शब्द यात्रा करते हैं इसलिए पीठ पीछे भी, किसी की निंदा न करें
धन से ज्ञान उत्तम है, क्योंकि धन की रक्षा करनी पड़ती है और ज्ञान हमारी रक्षा करता है