क़दर तो वो होती है जो किसी की मौजूदगी में हो, जो किसी के बाद हो.... उसे पछतावा कहते हैं ।
●आवाज का लहजा एक पल में बता देता है कि... रिश्ता कितना गहरा है●
तू रख यकीन बस अपने इरादों पर, तेरी हार, तेरे हौसलों से तो बड़ी नहीं होगी ।
अगर कोई पसंद आ जाए तो दूसरों से नहीं पूछना चाहिए वो कैसा है
प्रेम में बोला गया मात्र एक झूठ कभी ना टूटने वाले संबंध की जड़े भी हिला देता है
सबसे बड़ी रिस्क तब रहती है जब हमें पता नही रहता कि हम क्या कर रहे है
क़दर तो वो होती है जो किसी की मौजूदगी में हो, जो किसी के बाद हो.... उसे पछतावा कहते हैं ।
●आवाज का लहजा एक पल में बता देता है कि... रिश्ता कितना गहरा है●
तू रख यकीन बस अपने इरादों पर, तेरी हार, तेरे हौसलों से तो बड़ी नहीं होगी ।
अगर कोई पसंद आ जाए तो दूसरों से नहीं पूछना चाहिए वो कैसा है
प्रेम में बोला गया मात्र एक झूठ कभी ना टूटने वाले संबंध की जड़े भी हिला देता है
सबसे बड़ी रिस्क तब रहती है जब हमें पता नही रहता कि हम क्या कर रहे है