जीवन कठिन तब लगता है जब हम स्वयं में बदलाव करने के बजय परिस्थितयो को बदलने का प्रयास करते है
पत्तों सी होती है कई रिश्तों की उम्र...! आज हरे...........कल सूखे क्यों न हम जड़ों से रिश्ते निभाना सीखें...
जहाँ दूसरे को समझाना मुश्किल हो जाये, वहाँ खुद को समझा लेना बहतर होता है.
अच्छे के साथ बुरा भी उसके अच्छे के लिए ही होता है..
दूसरों की गलती से भी सीखा करो खुद की गलती से सीखने चलोगे तो सफलता जल्दी नहीं मिलेगी
"लगन" एक छोटा सा शब्द है लेकिन जिसे लग जाती है उसका जीवन बदल देती है
जीवन कठिन तब लगता है जब हम स्वयं में बदलाव करने के बजय परिस्थितयो को बदलने का प्रयास करते है
पत्तों सी होती है कई रिश्तों की उम्र...! आज हरे...........कल सूखे क्यों न हम जड़ों से रिश्ते निभाना सीखें...
जहाँ दूसरे को समझाना मुश्किल हो जाये, वहाँ खुद को समझा लेना बहतर होता है.
अच्छे के साथ बुरा भी उसके अच्छे के लिए ही होता है..
दूसरों की गलती से भी सीखा करो खुद की गलती से सीखने चलोगे तो सफलता जल्दी नहीं मिलेगी
"लगन" एक छोटा सा शब्द है लेकिन जिसे लग जाती है उसका जीवन बदल देती है