जिस रिश्ते में हमारी अहमियत खत्म हो चुकी हो, उसे चुप चाप छोड़ देना ही बेहतर है
पत्तों सी होती है कई रिश्तों की उम्र...! आज हरे...........कल सूखे क्यों न हम जड़ों से रिश्ते निभाना सीखें...
मासूमियत इतनी भी नही होनी चाहिए की लोग आपके साथ वक्त गुजारे और आप उसे म्होब्बत समझे
कुछ भी काम कर लो, मगर उस काम में तुमसे बेहतर "कोई नही होना चाहिए"
आर्थिक स्थिति चाहे कितनी भी अच्छी हो, जीवन का सही आनंद लेने के लिए मानसिक स्थिति का अच्छा होना बहुत जरूरी है
जीवन कठिन तब लगता है जब हम स्वयं में बदलाव करने के बजय परिस्थितयो को बदलने का प्रयास करते है
जिस रिश्ते में हमारी अहमियत खत्म हो चुकी हो, उसे चुप चाप छोड़ देना ही बेहतर है
पत्तों सी होती है कई रिश्तों की उम्र...! आज हरे...........कल सूखे क्यों न हम जड़ों से रिश्ते निभाना सीखें...
मासूमियत इतनी भी नही होनी चाहिए की लोग आपके साथ वक्त गुजारे और आप उसे म्होब्बत समझे
कुछ भी काम कर लो, मगर उस काम में तुमसे बेहतर "कोई नही होना चाहिए"
आर्थिक स्थिति चाहे कितनी भी अच्छी हो, जीवन का सही आनंद लेने के लिए मानसिक स्थिति का अच्छा होना बहुत जरूरी है
जीवन कठिन तब लगता है जब हम स्वयं में बदलाव करने के बजय परिस्थितयो को बदलने का प्रयास करते है