अपने आपको किसी ना किसी काम मे व्यस्त रखो; क्योंकि व्यस्त इंसान को दुखी होने का समय नही मिलता..
अगर आप हमेशा अहंकार से भरे रहते हैं तो फिर इस दुनिया में आपके लिए सीखने को कुछ भी नहीं है ।
'श्रद्धा' ज्ञान देती हैं, 'नम्रता' मान देती हैं, 'योग्यता' स्थान देती हैं पर तीनों मिल जाए तो... व्यक्ति को हर जगह 'सम्मान' देती हैं...!
संभालना ही है तो रिश्ते संभालो तस्वीरे तो हर कोई संभाल के रखता है
जिस व्यक्ति ने कभी गलती नहीं कि उसने कभी कुछ नया करने की कोशिश नहीं की
साधुजन के दर्शन से पुण्य प्राप्त होता है. साधु तीर्थों के समान होते हैं, तीर्थों का फल तो कुछ समय बाद मिलता है, किन्तु साधु समागम तुरंत फल देता है’
अपने आपको किसी ना किसी काम मे व्यस्त रखो; क्योंकि व्यस्त इंसान को दुखी होने का समय नही मिलता..
अगर आप हमेशा अहंकार से भरे रहते हैं तो फिर इस दुनिया में आपके लिए सीखने को कुछ भी नहीं है ।
'श्रद्धा' ज्ञान देती हैं, 'नम्रता' मान देती हैं, 'योग्यता' स्थान देती हैं पर तीनों मिल जाए तो... व्यक्ति को हर जगह 'सम्मान' देती हैं...!
संभालना ही है तो रिश्ते संभालो तस्वीरे तो हर कोई संभाल के रखता है
जिस व्यक्ति ने कभी गलती नहीं कि उसने कभी कुछ नया करने की कोशिश नहीं की
साधुजन के दर्शन से पुण्य प्राप्त होता है. साधु तीर्थों के समान होते हैं, तीर्थों का फल तो कुछ समय बाद मिलता है, किन्तु साधु समागम तुरंत फल देता है’