सत्य कड़वा नहीं होता (जनाब,) तुम सिर्फ झूठ के स्वाद से वाकिफ़ हो।
यदि आप सच कहते हैं, तो आपको कुछ याद रखने की जरूरत नहीं रहती
"जीवन" में "पीछे" देखो "अनुभव" मिलेगा "जीवन में "आगे" देखो तो "आशा" मिलेगी "दायें" "बायें" देखो तो "सत्य" मिलेगा "स्वयं" के "अंदर" देखो तो "परमात्मा" और "आत्मविश्वास" मिलेगा..
नींद और निंदा पर जो विजय पा लेते है.. उन्हें आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता..
इंसान की तरह बोलना न आये तो जानवर की तरह मौन रहना अच्छा है।
अगर तुम एक खुशहाल जीवन जीना चाहते हो, तो अपने आप को अपने उद्देश्य से बांध लो ना कि लोगो से।
सत्य कड़वा नहीं होता (जनाब,) तुम सिर्फ झूठ के स्वाद से वाकिफ़ हो।
यदि आप सच कहते हैं, तो आपको कुछ याद रखने की जरूरत नहीं रहती
"जीवन" में "पीछे" देखो "अनुभव" मिलेगा "जीवन में "आगे" देखो तो "आशा" मिलेगी "दायें" "बायें" देखो तो "सत्य" मिलेगा "स्वयं" के "अंदर" देखो तो "परमात्मा" और "आत्मविश्वास" मिलेगा..
नींद और निंदा पर जो विजय पा लेते है.. उन्हें आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता..
इंसान की तरह बोलना न आये तो जानवर की तरह मौन रहना अच्छा है।
अगर तुम एक खुशहाल जीवन जीना चाहते हो, तो अपने आप को अपने उद्देश्य से बांध लो ना कि लोगो से।