दिल में बुराई रखने से बेहतर है, की नाराजगी जाहिर कर दो
गलतियां सुधार लेना ही आख़िरी विकल्प है क्योंकि चिंता कभी परिणाम को बदल नही सकती
दुनिया मे अधिक गम है उन सबको देखते हुए आपका बहुत कम है
'श्रद्धा' ज्ञान देती हैं, 'नम्रता' मान देती हैं, 'योग्यता' स्थान देती हैं पर तीनों मिल जाए तो... व्यक्ति को हर जगह 'सम्मान' देती हैं...!
ज्ञान से बढ़कर कोई दूसरा गुरु नहीं, काम-वासना के समान कोई दूसरा रोग नहीं, क्रोध के समान कोई आग नहीं और अज्ञानता के जैसा शत्रु कोई नहीं.
लोग आपकी कदर तभी करेंगे जब आप उनको उन्ही की तरह अनदेखा करना सीख जाओगे
दिल में बुराई रखने से बेहतर है, की नाराजगी जाहिर कर दो
गलतियां सुधार लेना ही आख़िरी विकल्प है क्योंकि चिंता कभी परिणाम को बदल नही सकती
दुनिया मे अधिक गम है उन सबको देखते हुए आपका बहुत कम है
'श्रद्धा' ज्ञान देती हैं, 'नम्रता' मान देती हैं, 'योग्यता' स्थान देती हैं पर तीनों मिल जाए तो... व्यक्ति को हर जगह 'सम्मान' देती हैं...!
ज्ञान से बढ़कर कोई दूसरा गुरु नहीं, काम-वासना के समान कोई दूसरा रोग नहीं, क्रोध के समान कोई आग नहीं और अज्ञानता के जैसा शत्रु कोई नहीं.
लोग आपकी कदर तभी करेंगे जब आप उनको उन्ही की तरह अनदेखा करना सीख जाओगे