उम्मीद हमे कभी भी छोड़ कर नहीं जाती बस हम ही उसे छोड़ देते है

उम्मीद हमे कभी भी छोड़ कर नहीं जाती बस हम ही उसे छोड़ देते है

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गाय चाहे जो खा ले दूध ही देगी. इसी प्रकार विद्वान कैसा भी आचरण करे, वह निश्चित ही अनुकरणीय होगा, परन्तु यह तथ्य केवल समझदार ही समझ सकते है.

दूसरों की खुशी में खुश रहना सीखो वरना दूसरे अपनी खुशी में बुलाना बंद कर देंगे।

सुख और दुःख में सामान रूप से सहायक होना चाहिए।

अपनी छवि का ध्यान रखे, क्योंकि इसकी आयु आपकी आयु से कही ज्यादा होती है

जहाँ दूसरे को समझाना मुश्किल हो जाये, वहाँ खुद को समझा लेना बहतर होता है.

जिसने साथ दिया उसका साथ दो परंतु जिसने त्याग दिया उसे तुम भी त्याग दो

गाय चाहे जो खा ले दूध ही देगी. इसी प्रकार विद्वान कैसा भी आचरण करे, वह निश्चित ही अनुकरणीय होगा, परन्तु यह तथ्य केवल समझदार ही समझ सकते है.

दूसरों की खुशी में खुश रहना सीखो वरना दूसरे अपनी खुशी में बुलाना बंद कर देंगे।

सुख और दुःख में सामान रूप से सहायक होना चाहिए।

अपनी छवि का ध्यान रखे, क्योंकि इसकी आयु आपकी आयु से कही ज्यादा होती है

जहाँ दूसरे को समझाना मुश्किल हो जाये, वहाँ खुद को समझा लेना बहतर होता है.

जिसने साथ दिया उसका साथ दो परंतु जिसने त्याग दिया उसे तुम भी त्याग दो