वक्त, ख्वाहिशें और सपने हाथ में बंधी घड़ी की तरह होते हैं जिसे हम उतार कर रख भी दें तो भी चलती रहती है

वक्त, ख्वाहिशें और सपने हाथ में बंधी घड़ी की तरह होते हैं जिसे हम उतार कर रख भी दें तो भी चलती रहती है

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"बदलना" ख़राब नहीं हैं , ख़राब हैं बदल कर , पहले से "बदतर" हो जाना

देर से बनो मगर जरूर कुछ बनो क्योकि वक़्त के साथ लोग खेरियत नहीं हैसियत पूछते है

परिस्थिति कुछ भी हो डट कर खड़े रहना चाहिए, सही समय आने पर खट्टी कैरी भी बदल कर मीठा आम बन जाती है...

तुम अयोग्य या बदसूरत नहीं हो तुम्हारे पास सिर्फ पैसे या पद की कमी है।

यदि तुम्हारा पड़ोसी भूखा है तो मंदिर में प्रसाद चढ़ाना पाप है

अधेरा वहां नहीं है जहां तन गरीब है अंधेरा वहां है जहां मन गरीब है

"बदलना" ख़राब नहीं हैं , ख़राब हैं बदल कर , पहले से "बदतर" हो जाना

देर से बनो मगर जरूर कुछ बनो क्योकि वक़्त के साथ लोग खेरियत नहीं हैसियत पूछते है

परिस्थिति कुछ भी हो डट कर खड़े रहना चाहिए, सही समय आने पर खट्टी कैरी भी बदल कर मीठा आम बन जाती है...

तुम अयोग्य या बदसूरत नहीं हो तुम्हारे पास सिर्फ पैसे या पद की कमी है।

यदि तुम्हारा पड़ोसी भूखा है तो मंदिर में प्रसाद चढ़ाना पाप है

अधेरा वहां नहीं है जहां तन गरीब है अंधेरा वहां है जहां मन गरीब है