निंदा से घबराकर लक्ष्य को मत छोड़े क्योंकि निंदा करने वालों की राय लक्ष्य मिलते ही बदल जाती है

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गलतियों से न सीखना ही एकमात्र गलती होती है

"हर इंसान में कुछ न कुछ प्रतिभा होती है लेकिन अक्सर लोग इसे दूसरों के जैसा बनने में नष्ट कर देते हैं"

कमियां ढूंढने में कोई दिक्कत नहीं है, बस शुरुआत खुद से करें!

यदि गुलाब की तरह खिलना चाहते है तो काँटों के साथ तालमेल की कला सीखनी होगी!

वृक्ष कभी इस बात पर व्यथित नहीं होता कि उसने कितने पुष्प खो दिए वह सदैव नए फूलों के सृजन में व्यस्त रहता है जीवन में कितना कुछ खो गया, इस पीड़ा को भूल कर, क्या नया कर सकते हैं, इसी में जीवन की सार्थकता है

जैसे फलों में गंध, तिलों में तेल, काष्ठ में अग्नि, दुग्ध में घी, गन्ने में गुड़ है, उसी तरह शरीर में परमात्मा है. इसे पहचानना चाहिए.

गलतियों से न सीखना ही एकमात्र गलती होती है

"हर इंसान में कुछ न कुछ प्रतिभा होती है लेकिन अक्सर लोग इसे दूसरों के जैसा बनने में नष्ट कर देते हैं"

कमियां ढूंढने में कोई दिक्कत नहीं है, बस शुरुआत खुद से करें!

यदि गुलाब की तरह खिलना चाहते है तो काँटों के साथ तालमेल की कला सीखनी होगी!

वृक्ष कभी इस बात पर व्यथित नहीं होता कि उसने कितने पुष्प खो दिए वह सदैव नए फूलों के सृजन में व्यस्त रहता है जीवन में कितना कुछ खो गया, इस पीड़ा को भूल कर, क्या नया कर सकते हैं, इसी में जीवन की सार्थकता है

जैसे फलों में गंध, तिलों में तेल, काष्ठ में अग्नि, दुग्ध में घी, गन्ने में गुड़ है, उसी तरह शरीर में परमात्मा है. इसे पहचानना चाहिए.