देर से बनो मगर जरूर कुछ बनो क्योकि वक़्त के साथ लोग खेरियत नहीं हैसियत पूछते है
वृक्ष कभी इस बात पर व्यथित नहीं होता कि उसने कितने पुष्प खो दिए वह सदैव नए फूलों के सृजन में व्यस्त रहता है जीवन में कितना कुछ खो गया, इस पीड़ा को भूल कर, क्या नया कर सकते हैं, इसी में जीवन की सार्थकता है
कोई अगर आप पे आँखे बंद करके भरोशा करता है तो उसे कभी ये एहसास मत दिलाना की वो अंधा है
किसी के आगे हाथ फैलाने से अच्छा अपने हाथों को काम मे लगा दो
बुरे वक्त की सबसे अच्छी बात पता है क्या है ? वो भी बीत जाता है
तो क्या हुआ जो पहली बार में सफलता नहीं मिली, वैसे तो ईश्वर आज तक भी नहीं मिला, लेकिन क्या हमने पूजा करना छोड़ दिया
देर से बनो मगर जरूर कुछ बनो क्योकि वक़्त के साथ लोग खेरियत नहीं हैसियत पूछते है
वृक्ष कभी इस बात पर व्यथित नहीं होता कि उसने कितने पुष्प खो दिए वह सदैव नए फूलों के सृजन में व्यस्त रहता है जीवन में कितना कुछ खो गया, इस पीड़ा को भूल कर, क्या नया कर सकते हैं, इसी में जीवन की सार्थकता है
कोई अगर आप पे आँखे बंद करके भरोशा करता है तो उसे कभी ये एहसास मत दिलाना की वो अंधा है
किसी के आगे हाथ फैलाने से अच्छा अपने हाथों को काम मे लगा दो
बुरे वक्त की सबसे अच्छी बात पता है क्या है ? वो भी बीत जाता है
तो क्या हुआ जो पहली बार में सफलता नहीं मिली, वैसे तो ईश्वर आज तक भी नहीं मिला, लेकिन क्या हमने पूजा करना छोड़ दिया