ठोकर इसलिए नहीं लगती कि इंसान गिर जाए बल्कि वो तो इसलिए लगती है कि इंसान सुधर जाए .
इच्छाओं का भी अपना चरित्र होता है... खुद के मन की हो तो बहुत अच्छी लगती हैं दूसरों के मन की हो तो बहुत खटकती है
अपनी छवि का ध्यान रखे, क्योंकि इसकी आयु आपकी आयु से कही ज्यादा होती है
हर काम मुश्किल होता है, आसान होने से पहले
जीवन में सबसे बड़ा नुकसान हमारी मृत्यु नहीं बल्कि एक हारा और टूटा हुआ मन है
झाँकने की कुछ.. बेहतरीन जगहों में से, एक जगह .. अपना गिरेबान भी है!
ठोकर इसलिए नहीं लगती कि इंसान गिर जाए बल्कि वो तो इसलिए लगती है कि इंसान सुधर जाए .
इच्छाओं का भी अपना चरित्र होता है... खुद के मन की हो तो बहुत अच्छी लगती हैं दूसरों के मन की हो तो बहुत खटकती है
अपनी छवि का ध्यान रखे, क्योंकि इसकी आयु आपकी आयु से कही ज्यादा होती है
हर काम मुश्किल होता है, आसान होने से पहले
जीवन में सबसे बड़ा नुकसान हमारी मृत्यु नहीं बल्कि एक हारा और टूटा हुआ मन है
झाँकने की कुछ.. बेहतरीन जगहों में से, एक जगह .. अपना गिरेबान भी है!