सारा जहां है जिसकी शरण में, नमन है उस माँ के चरण में.
अहिंसा ही धर्म है, वही जिंदगी का एक रास्ता है।
ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं । भर्गो देवस्य धीमहि, धीयो यो न: प्रचोदयात् ।।
॥ जय माता दी ॥
नादान हूँ नादानियाँ कर जाता हूँ दुनियाँ के चक्कर में तुझे भूल जाता हूँ तेरा बडप्पन की तू सम्भाल लेता है मेरे गिरने से पहले तू थाम लेता है
॥ शुभ नवरात्री ॥
सारा जहां है जिसकी शरण में, नमन है उस माँ के चरण में.
अहिंसा ही धर्म है, वही जिंदगी का एक रास्ता है।
ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं । भर्गो देवस्य धीमहि, धीयो यो न: प्रचोदयात् ।।
॥ जय माता दी ॥
नादान हूँ नादानियाँ कर जाता हूँ दुनियाँ के चक्कर में तुझे भूल जाता हूँ तेरा बडप्पन की तू सम्भाल लेता है मेरे गिरने से पहले तू थाम लेता है
॥ शुभ नवरात्री ॥