|| ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॐ ||

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नमो नमो दुर्गे सुख करनी. नमो नमो अम्बे दुःख हरनी.!

॥ जय अम्बे गौरी ॥

मन, वचन और कर्म से मनुष्य जिस विषय का बार – बार ध्यान करता है, वही उसे अपनी और आकर्षित कर लेता है, अत: सदैव अच्छे कर्म ही करने चाहिए।

मनुष्य अकेला पाप करता है और बहुत से लोग उसका आनंद उठाते हैं। आनंद उठाने वाले तो बच जाते हैं; पर पाप करने वाला दोष का भागी होता है।

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥१॥

सारा जहां है जिसकी शरण में, नमन है उस माँ के चरण में.

नमो नमो दुर्गे सुख करनी. नमो नमो अम्बे दुःख हरनी.!

॥ जय अम्बे गौरी ॥

मन, वचन और कर्म से मनुष्य जिस विषय का बार – बार ध्यान करता है, वही उसे अपनी और आकर्षित कर लेता है, अत: सदैव अच्छे कर्म ही करने चाहिए।

मनुष्य अकेला पाप करता है और बहुत से लोग उसका आनंद उठाते हैं। आनंद उठाने वाले तो बच जाते हैं; पर पाप करने वाला दोष का भागी होता है।

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥१॥

सारा जहां है जिसकी शरण में, नमन है उस माँ के चरण में.