माँ ! मैं सब कुछ भूल सकती हूँ…तुम्हे नहीं ।
कोई तन दुखी, कोई मन दुखी, कोई धन बिन रहत उदास | थोड़े थोड़े सब दुखी, सुखी सिर्फ मेरे सतगुरु के दास ||
मन, वचन और कर्म से मनुष्य जिस विषय का बार – बार ध्यान करता है, वही उसे अपनी और आकर्षित कर लेता है, अत: सदैव अच्छे कर्म ही करने चाहिए।
॥ जय माता दी ॥
अरे कर्मों से डरिए ईश्वर से नहीं, ईश्वर माफ कर देता है कर्म नहीं
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥१॥
माँ ! मैं सब कुछ भूल सकती हूँ…तुम्हे नहीं ।
कोई तन दुखी, कोई मन दुखी, कोई धन बिन रहत उदास | थोड़े थोड़े सब दुखी, सुखी सिर्फ मेरे सतगुरु के दास ||
मन, वचन और कर्म से मनुष्य जिस विषय का बार – बार ध्यान करता है, वही उसे अपनी और आकर्षित कर लेता है, अत: सदैव अच्छे कर्म ही करने चाहिए।
॥ जय माता दी ॥
अरे कर्मों से डरिए ईश्वर से नहीं, ईश्वर माफ कर देता है कर्म नहीं
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥१॥