॥ जय अम्बे गौरी ॥
ना घर पर रहते है ना घाट पर रहते है हम तो उनकी शरण में रहते है जिन्हें लोग महाकाल कहते हैं
नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥
॥ ॐ ह्रीं दुं दुर्गाय नमः ॥
माँ ! मैं सब कुछ भूल सकती हूँ…तुम्हे नहीं ।
प्रेम अगर करना ही है तो, मेरे "कन्हा" से करो जिसके विरह में रोने से भी तुम्हारा उद्धार हो जाएगा !!
॥ जय अम्बे गौरी ॥
ना घर पर रहते है ना घाट पर रहते है हम तो उनकी शरण में रहते है जिन्हें लोग महाकाल कहते हैं
नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥
॥ ॐ ह्रीं दुं दुर्गाय नमः ॥
माँ ! मैं सब कुछ भूल सकती हूँ…तुम्हे नहीं ।
प्रेम अगर करना ही है तो, मेरे "कन्हा" से करो जिसके विरह में रोने से भी तुम्हारा उद्धार हो जाएगा !!