वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा,निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा॥

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा,निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा॥

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॥ जय अम्बे गौरी ॥

ना घर पर रहते है ना घाट पर रहते है हम तो उनकी शरण में रहते है जिन्हें लोग महाकाल कहते हैं

नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥

॥ ॐ ह्रीं दुं दुर्गाय नमः ॥

माँ ! मैं सब कुछ भूल सकती हूँ…तुम्हे नहीं ।

प्रेम अगर करना ही है तो, मेरे "कन्हा" से करो जिसके विरह में रोने से भी तुम्हारा उद्धार हो जाएगा !!

॥ जय अम्बे गौरी ॥

ना घर पर रहते है ना घाट पर रहते है हम तो उनकी शरण में रहते है जिन्हें लोग महाकाल कहते हैं

नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥

॥ ॐ ह्रीं दुं दुर्गाय नमः ॥

माँ ! मैं सब कुछ भूल सकती हूँ…तुम्हे नहीं ।

प्रेम अगर करना ही है तो, मेरे "कन्हा" से करो जिसके विरह में रोने से भी तुम्हारा उद्धार हो जाएगा !!