जो उपकार करे, उसका प्रत्युपकार करना चाहिए, यही सनातन धर्म है

जो उपकार करे, उसका प्रत्युपकार करना चाहिए, यही सनातन धर्म है

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काल भी तुम और महाकाल भी तुम लोक भी तुम और त्रिलोक भी तुम शिव भी तुम और सत्यम भी तुम |

॥ जय अम्बे गौरी ॥

जगत पालनहार है माँ, मुक्ति का धाम है माँ, हमारी भक्ति का आधार है माँ, सबकी रक्षा की अवतार है माँ, शुभ नवरात्रि

|| ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॐ ||

फिक्र करना ही क्यूँ फिक्र से होता है क्या | भरोसा रखो "श्याम" पर फिर देखो होता है क्या ||

सारा जहां है जिसकी शरण में, नमन है उस माँ के चरण में.

काल भी तुम और महाकाल भी तुम लोक भी तुम और त्रिलोक भी तुम शिव भी तुम और सत्यम भी तुम |

॥ जय अम्बे गौरी ॥

जगत पालनहार है माँ, मुक्ति का धाम है माँ, हमारी भक्ति का आधार है माँ, सबकी रक्षा की अवतार है माँ, शुभ नवरात्रि

|| ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॐ ||

फिक्र करना ही क्यूँ फिक्र से होता है क्या | भरोसा रखो "श्याम" पर फिर देखो होता है क्या ||

सारा जहां है जिसकी शरण में, नमन है उस माँ के चरण में.