हर आरम्भ का मैं अंत हूँ, हर अंत का मैं आरम्भ हूँ , मैं सत्य हूँ; मैं शिव हूँ; मैं काल हूँ; मैं ही महाकाल हूँ !

हर आरम्भ का मैं अंत हूँ, हर अंत का मैं आरम्भ हूँ , मैं सत्य हूँ; मैं शिव हूँ; मैं काल हूँ; मैं ही महाकाल हूँ !

Share:

More Like This

दे दो बस एक ही वरदान, आपके भगत से न हो पाये कभी कोई बुरा काम हर हर महादेव |

ना घर पर रहते है ना घाट पर रहते है हम तो उनकी शरण में रहते है जिन्हें लोग महाकाल कहते हैं

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता| नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ||

नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥

अहिंसा ही धर्म है, वही जिंदगी का एक रास्ता है।

जो उपकार करे, उसका प्रत्युपकार करना चाहिए, यही सनातन धर्म है

दे दो बस एक ही वरदान, आपके भगत से न हो पाये कभी कोई बुरा काम हर हर महादेव |

ना घर पर रहते है ना घाट पर रहते है हम तो उनकी शरण में रहते है जिन्हें लोग महाकाल कहते हैं

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता| नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ||

नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥

अहिंसा ही धर्म है, वही जिंदगी का एक रास्ता है।

जो उपकार करे, उसका प्रत्युपकार करना चाहिए, यही सनातन धर्म है