माँ ! मैं सब कुछ भूल सकती हूँ…तुम्हे नहीं ।
नादान हूँ नादानियाँ कर जाता हूँ दुनियाँ के चक्कर में तुझे भूल जाता हूँ तेरा बडप्पन की तू सम्भाल लेता है मेरे गिरने से पहले तू थाम लेता है
मनुष्य अकेला पाप करता है और बहुत से लोग उसका आनंद उठाते हैं। आनंद उठाने वाले तो बच जाते हैं; पर पाप करने वाला दोष का भागी होता है।
आ बैठ मेरे मालिक आज बटवारा कर ही लें, सारी दुनिया तेरी और सिर्फ तूं मेरा |
॥ ॐ ह्रीं दुं दुर्गाय नमः ॥
|| ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॐ ||
माँ ! मैं सब कुछ भूल सकती हूँ…तुम्हे नहीं ।
नादान हूँ नादानियाँ कर जाता हूँ दुनियाँ के चक्कर में तुझे भूल जाता हूँ तेरा बडप्पन की तू सम्भाल लेता है मेरे गिरने से पहले तू थाम लेता है
मनुष्य अकेला पाप करता है और बहुत से लोग उसका आनंद उठाते हैं। आनंद उठाने वाले तो बच जाते हैं; पर पाप करने वाला दोष का भागी होता है।
आ बैठ मेरे मालिक आज बटवारा कर ही लें, सारी दुनिया तेरी और सिर्फ तूं मेरा |
॥ ॐ ह्रीं दुं दुर्गाय नमः ॥
|| ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॐ ||