जय श्री राधा सनेह बिहारी जी ॥

जय श्री राधा सनेह बिहारी जी ॥

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मन, वचन और कर्म से मनुष्य जिस विषय का बार – बार ध्यान करता है, वही उसे अपनी और आकर्षित कर लेता है, अत: सदैव अच्छे कर्म ही करने चाहिए।

सारा जहां है जिसकी शरण में, नमन है उस माँ के चरण में

न कोई चेला न कोई मेला, मन मिले तो मिल जाओ मुझसे, वरना शिव भक्त चले अकेला || बम बम भोले ||

नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥

कर्म तेरे अच्छे है तो किस्मत तेरी दासी है || नियत तेरी अच्छी है तो घर मथुरा काशी है ||

सारा जहां है जिसकी शरण में, नमन है उस माँ के चरण में.

मन, वचन और कर्म से मनुष्य जिस विषय का बार – बार ध्यान करता है, वही उसे अपनी और आकर्षित कर लेता है, अत: सदैव अच्छे कर्म ही करने चाहिए।

सारा जहां है जिसकी शरण में, नमन है उस माँ के चरण में

न कोई चेला न कोई मेला, मन मिले तो मिल जाओ मुझसे, वरना शिव भक्त चले अकेला || बम बम भोले ||

नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥

कर्म तेरे अच्छे है तो किस्मत तेरी दासी है || नियत तेरी अच्छी है तो घर मथुरा काशी है ||

सारा जहां है जिसकी शरण में, नमन है उस माँ के चरण में.