जय श्री राधा सनेह बिहारी जी ॥

जय श्री राधा सनेह बिहारी जी ॥

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जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥१॥

धर्म की सबसे सरल व्याख्या किसी भी आत्मा को हमारी वजह से दुःख ना पहुँचे यही धर्म है.

नादान हूँ नादानियाँ कर जाता हूँ दुनियाँ के चक्कर में तुझे भूल जाता हूँ तेरा बडप्पन की तू सम्भाल लेता है मेरे गिरने से पहले तू थाम लेता है

सारा जहां है जिसकी शरण में, नमन है उस माँ के चरण में

॥ जय माता दी ॥

|| ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॐ ||

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥१॥

धर्म की सबसे सरल व्याख्या किसी भी आत्मा को हमारी वजह से दुःख ना पहुँचे यही धर्म है.

नादान हूँ नादानियाँ कर जाता हूँ दुनियाँ के चक्कर में तुझे भूल जाता हूँ तेरा बडप्पन की तू सम्भाल लेता है मेरे गिरने से पहले तू थाम लेता है

सारा जहां है जिसकी शरण में, नमन है उस माँ के चरण में

॥ जय माता दी ॥

|| ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॐ ||