मन, वचन और कर्म से मनुष्य जिस विषय का बार – बार ध्यान करता है, वही उसे अपनी और आकर्षित कर लेता है, अत: सदैव अच्छे कर्म ही करने चाहिए।
सारा जहां है जिसकी शरण में, नमन है उस माँ के चरण में
न कोई चेला न कोई मेला, मन मिले तो मिल जाओ मुझसे, वरना शिव भक्त चले अकेला || बम बम भोले ||
नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥
कर्म तेरे अच्छे है तो किस्मत तेरी दासी है || नियत तेरी अच्छी है तो घर मथुरा काशी है ||
सारा जहां है जिसकी शरण में, नमन है उस माँ के चरण में.
मन, वचन और कर्म से मनुष्य जिस विषय का बार – बार ध्यान करता है, वही उसे अपनी और आकर्षित कर लेता है, अत: सदैव अच्छे कर्म ही करने चाहिए।
सारा जहां है जिसकी शरण में, नमन है उस माँ के चरण में
न कोई चेला न कोई मेला, मन मिले तो मिल जाओ मुझसे, वरना शिव भक्त चले अकेला || बम बम भोले ||
नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥
कर्म तेरे अच्छे है तो किस्मत तेरी दासी है || नियत तेरी अच्छी है तो घर मथुरा काशी है ||
सारा जहां है जिसकी शरण में, नमन है उस माँ के चरण में.