सारा जहां है जिसकी शरण में, नमन है उस माँ के चरण में
उसने ही जगत बनाया है कण-कण में वो ही समाया है दुख में भी सुख का अहसास होगा जब सिर पर शिव का साया है
माँ ! मैं सब कुछ भूल सकती हूँ…तुम्हे नहीं ।
जगत पालनहार है माँ, मुक्ति का धाम है माँ, हमारी भक्ति का आधार है माँ, सबकी रक्षा की अवतार है माँ, शुभ नवरात्रि
जो उपकार करे, उसका प्रत्युपकार करना चाहिए, यही सनातन धर्म है
ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं । भर्गो देवस्य धीमहि, धीयो यो न: प्रचोदयात् ।।
सारा जहां है जिसकी शरण में, नमन है उस माँ के चरण में
उसने ही जगत बनाया है कण-कण में वो ही समाया है दुख में भी सुख का अहसास होगा जब सिर पर शिव का साया है
माँ ! मैं सब कुछ भूल सकती हूँ…तुम्हे नहीं ।
जगत पालनहार है माँ, मुक्ति का धाम है माँ, हमारी भक्ति का आधार है माँ, सबकी रक्षा की अवतार है माँ, शुभ नवरात्रि
जो उपकार करे, उसका प्रत्युपकार करना चाहिए, यही सनातन धर्म है
ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं । भर्गो देवस्य धीमहि, धीयो यो न: प्रचोदयात् ।।