नादान हूँ नादानियाँ कर जाता हूँ दुनियाँ के चक्कर में तुझे भूल जाता हूँ तेरा बडप्पन की तू सम्भाल लेता है मेरे गिरने से पहले तू थाम लेता है

नादान हूँ नादानियाँ कर जाता हूँ दुनियाँ के चक्कर में तुझे भूल जाता हूँ तेरा बडप्पन की तू सम्भाल लेता है मेरे गिरने से पहले तू थाम लेता है

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जय श्री राधा सनेह बिहारी जी ॥

जगत पालनहार है माँ, मुक्ति का धाम है माँ, हमारी भक्ति का आधार है माँ, सबकी रक्षा की अवतार है माँ, शुभ नवरात्रि

सारा जहां है जिसकी शरण में, नमन है उस माँ के चरण में.

जो उपकार करे, उसका प्रत्युपकार करना चाहिए, यही सनातन धर्म है

॥ जय माँ शक्ति ॥

प्रेम अगर करना ही है तो, मेरे "कन्हा" से करो जिसके विरह में रोने से भी तुम्हारा उद्धार हो जाएगा !!

जय श्री राधा सनेह बिहारी जी ॥

जगत पालनहार है माँ, मुक्ति का धाम है माँ, हमारी भक्ति का आधार है माँ, सबकी रक्षा की अवतार है माँ, शुभ नवरात्रि

सारा जहां है जिसकी शरण में, नमन है उस माँ के चरण में.

जो उपकार करे, उसका प्रत्युपकार करना चाहिए, यही सनातन धर्म है

॥ जय माँ शक्ति ॥

प्रेम अगर करना ही है तो, मेरे "कन्हा" से करो जिसके विरह में रोने से भी तुम्हारा उद्धार हो जाएगा !!