नादान हूँ नादानियाँ कर जाता हूँ दुनियाँ के चक्कर में तुझे भूल जाता हूँ तेरा बडप्पन की तू सम्भाल लेता है मेरे गिरने से पहले तू थाम लेता है
कर्म भूमि की दुनिया में श्रम सभी को करना है भगवान सिर्फ लकीरें देता है रंग हमें ही भरना है | जय श्री कृष्णा
सारा जहां है जिसकी शरण में, नमन है उस माँ के चरण में.
नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥
जगत पालनहार है माँ, मुक्ति का धाम है माँ, हमारी भक्ति का आधार है माँ, सबकी रक्षा की अवतार है माँ, शुभ नवरात्रि
सुबह का आरंभ हरि के चरणों में नमन के साथ करें जय श्री कृष्णा
नादान हूँ नादानियाँ कर जाता हूँ दुनियाँ के चक्कर में तुझे भूल जाता हूँ तेरा बडप्पन की तू सम्भाल लेता है मेरे गिरने से पहले तू थाम लेता है
कर्म भूमि की दुनिया में श्रम सभी को करना है भगवान सिर्फ लकीरें देता है रंग हमें ही भरना है | जय श्री कृष्णा
सारा जहां है जिसकी शरण में, नमन है उस माँ के चरण में.
नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥
जगत पालनहार है माँ, मुक्ति का धाम है माँ, हमारी भक्ति का आधार है माँ, सबकी रक्षा की अवतार है माँ, शुभ नवरात्रि
सुबह का आरंभ हरि के चरणों में नमन के साथ करें जय श्री कृष्णा