॥ जय माँ शक्ति ॥

॥ जय माँ शक्ति ॥

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नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥

काल भी तुम और महाकाल भी तुम लोक भी तुम और त्रिलोक भी तुम शिव भी तुम और सत्यम भी तुम |

ॐ नमः शिवाय॥

स्पर्श वो नहीं जिसने शरीर को पाया हो, स्पर्श तो वो है जिसने आत्मा को गले लगाया हो | जय श्री राधे कृष्णा

मनुष्य अकेला पाप करता है और बहुत से लोग उसका आनंद उठाते हैं। आनंद उठाने वाले तो बच जाते हैं; पर पाप करने वाला दोष का भागी होता है।

अहिंसा ही धर्म है, वही जिंदगी का एक रास्ता है।

नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥

काल भी तुम और महाकाल भी तुम लोक भी तुम और त्रिलोक भी तुम शिव भी तुम और सत्यम भी तुम |

ॐ नमः शिवाय॥

स्पर्श वो नहीं जिसने शरीर को पाया हो, स्पर्श तो वो है जिसने आत्मा को गले लगाया हो | जय श्री राधे कृष्णा

मनुष्य अकेला पाप करता है और बहुत से लोग उसका आनंद उठाते हैं। आनंद उठाने वाले तो बच जाते हैं; पर पाप करने वाला दोष का भागी होता है।

अहिंसा ही धर्म है, वही जिंदगी का एक रास्ता है।