सुबह का आरंभ हरि के चरणों में नमन के साथ करें जय श्री कृष्णा
कर्म तेरे अच्छे है तो किस्मत तेरी दासी है || नियत तेरी अच्छी है तो घर मथुरा काशी है ||
नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥
॥ जय माता दी ॥
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥१॥
मनुष्य अकेला पाप करता है और बहुत से लोग उसका आनंद उठाते हैं। आनंद उठाने वाले तो बच जाते हैं; पर पाप करने वाला दोष का भागी होता है।
सुबह का आरंभ हरि के चरणों में नमन के साथ करें जय श्री कृष्णा
कर्म तेरे अच्छे है तो किस्मत तेरी दासी है || नियत तेरी अच्छी है तो घर मथुरा काशी है ||
नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥
॥ जय माता दी ॥
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥१॥
मनुष्य अकेला पाप करता है और बहुत से लोग उसका आनंद उठाते हैं। आनंद उठाने वाले तो बच जाते हैं; पर पाप करने वाला दोष का भागी होता है।