काल भी तुम और महाकाल भी तुम लोक भी तुम और त्रिलोक भी तुम शिव भी तुम और सत्यम भी तुम |
॥ जय माँ शक्ति ॥
सुबह का आरंभ हरि के चरणों में नमन के साथ करें जय श्री कृष्णा
मनुष्य अकेला पाप करता है और बहुत से लोग उसका आनंद उठाते हैं। आनंद उठाने वाले तो बच जाते हैं; पर पाप करने वाला दोष का भागी होता है।
ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं । भर्गो देवस्य धीमहि, धीयो यो न: प्रचोदयात् ।।
|| ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॐ ||
काल भी तुम और महाकाल भी तुम लोक भी तुम और त्रिलोक भी तुम शिव भी तुम और सत्यम भी तुम |
॥ जय माँ शक्ति ॥
सुबह का आरंभ हरि के चरणों में नमन के साथ करें जय श्री कृष्णा
मनुष्य अकेला पाप करता है और बहुत से लोग उसका आनंद उठाते हैं। आनंद उठाने वाले तो बच जाते हैं; पर पाप करने वाला दोष का भागी होता है।
ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं । भर्गो देवस्य धीमहि, धीयो यो न: प्रचोदयात् ।।
|| ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॐ ||