सुबह का आरंभ हरि के चरणों में नमन के साथ करें जय श्री कृष्णा
गायत्र्येव परो विष्णुर्गात्र्येव परः शिवः ।गायत्र्येव परो ब्रह्मा गायत्र्येव त्रयी ततः ॥
मन, वचन और कर्म से मनुष्य जिस विषय का बार – बार ध्यान करता है, वही उसे अपनी और आकर्षित कर लेता है, अत: सदैव अच्छे कर्म ही करने चाहिए।
नमो नमो दुर्गे सुख करनी. नमो नमो अम्बे दुःख हरनी.!
जय माँ वैष्णो देवी..पहाडा वाली..ज्योता वाली॥
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा,निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा॥
सुबह का आरंभ हरि के चरणों में नमन के साथ करें जय श्री कृष्णा
गायत्र्येव परो विष्णुर्गात्र्येव परः शिवः ।गायत्र्येव परो ब्रह्मा गायत्र्येव त्रयी ततः ॥
मन, वचन और कर्म से मनुष्य जिस विषय का बार – बार ध्यान करता है, वही उसे अपनी और आकर्षित कर लेता है, अत: सदैव अच्छे कर्म ही करने चाहिए।
नमो नमो दुर्गे सुख करनी. नमो नमो अम्बे दुःख हरनी.!
जय माँ वैष्णो देवी..पहाडा वाली..ज्योता वाली॥
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा,निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा॥