मुझे फुरसत कहा जो मौसम सुहाना देखू महादेव की यादों से निकलू तो जमाना देखू
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा,निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा॥
दे दो बस एक ही वरदान, आपके भगत से न हो पाये कभी कोई बुरा काम हर हर महादेव |
॥ ॐ ह्रीं दुं दुर्गाय नमः ॥
जो उपकार करे, उसका प्रत्युपकार करना चाहिए, यही सनातन धर्म है
हर आरम्भ का मैं अंत हूँ, हर अंत का मैं आरम्भ हूँ , मैं सत्य हूँ; मैं शिव हूँ; मैं काल हूँ; मैं ही महाकाल हूँ !
मुझे फुरसत कहा जो मौसम सुहाना देखू महादेव की यादों से निकलू तो जमाना देखू
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा,निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा॥
दे दो बस एक ही वरदान, आपके भगत से न हो पाये कभी कोई बुरा काम हर हर महादेव |
॥ ॐ ह्रीं दुं दुर्गाय नमः ॥
जो उपकार करे, उसका प्रत्युपकार करना चाहिए, यही सनातन धर्म है
हर आरम्भ का मैं अंत हूँ, हर अंत का मैं आरम्भ हूँ , मैं सत्य हूँ; मैं शिव हूँ; मैं काल हूँ; मैं ही महाकाल हूँ !