जय श्री राधा सनेह बिहारी जी ॥
सेवा सबकी कीजिये मगर आशा किसी से मत रखिये क्योंकि सेवा का सही मूल्य भगवान ही दे सकता है इंसान नहीं |
कौन कहता है तेरे दर से मांगने वाला गरीब होता है जो तेरे दर तक पहुच जाय वो सबसे बड़ा खुशनसीब होता है
जो उपकार करे, उसका प्रत्युपकार करना चाहिए, यही सनातन धर्म है
॥ शुभ नवरात्री ॥
अरे कर्मों से डरिए ईश्वर से नहीं, ईश्वर माफ कर देता है कर्म नहीं
जय श्री राधा सनेह बिहारी जी ॥
सेवा सबकी कीजिये मगर आशा किसी से मत रखिये क्योंकि सेवा का सही मूल्य भगवान ही दे सकता है इंसान नहीं |
कौन कहता है तेरे दर से मांगने वाला गरीब होता है जो तेरे दर तक पहुच जाय वो सबसे बड़ा खुशनसीब होता है
जो उपकार करे, उसका प्रत्युपकार करना चाहिए, यही सनातन धर्म है
॥ शुभ नवरात्री ॥
अरे कर्मों से डरिए ईश्वर से नहीं, ईश्वर माफ कर देता है कर्म नहीं