काल भी तुम और महाकाल भी तुम लोक भी तुम और त्रिलोक भी तुम शिव भी तुम और सत्यम भी तुम |

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धर्म की सबसे सरल व्याख्या किसी भी आत्मा को हमारी वजह से दुःख ना पहुँचे यही धर्म है.

आ बैठ मेरे मालिक आज बटवारा कर ही लें, सारी दुनिया तेरी और सिर्फ तूं मेरा |

|| ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॐ ||

॥ ॐ ह्रीं दुं दुर्गाय नमः ॥

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥१॥

॥ शुभ नवरात्री ॥

धर्म की सबसे सरल व्याख्या किसी भी आत्मा को हमारी वजह से दुःख ना पहुँचे यही धर्म है.

आ बैठ मेरे मालिक आज बटवारा कर ही लें, सारी दुनिया तेरी और सिर्फ तूं मेरा |

|| ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॐ ||

॥ ॐ ह्रीं दुं दुर्गाय नमः ॥

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥१॥

॥ शुभ नवरात्री ॥