॥ जय माता दी ॥
|| ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॐ ||
मनुष्य को कभी भी सत्य, दान, कर्मण्यता, अनसूया (गुणों में दोष दिखाने की प्रवृत्ति का अभाव ), क्षमा तथा धैर्य – इन छः गुणों का त्याग नहीं करना चाहिए।
माँ ! मैं सब कुछ भूल सकती हूँ…तुम्हे नहीं ।
हीरा बनाया है ईश्वर ने हर किसी को, पर चमकता तो वही है जो तराशने की हद से गुजरता है. सतनाम श्री वाहेगुरु |
॥ ॐ ह्रीं दुं दुर्गाय नमः ॥
॥ जय माता दी ॥
|| ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॐ ||
मनुष्य को कभी भी सत्य, दान, कर्मण्यता, अनसूया (गुणों में दोष दिखाने की प्रवृत्ति का अभाव ), क्षमा तथा धैर्य – इन छः गुणों का त्याग नहीं करना चाहिए।
माँ ! मैं सब कुछ भूल सकती हूँ…तुम्हे नहीं ।
हीरा बनाया है ईश्वर ने हर किसी को, पर चमकता तो वही है जो तराशने की हद से गुजरता है. सतनाम श्री वाहेगुरु |
॥ ॐ ह्रीं दुं दुर्गाय नमः ॥