सारा जहां है जिसकी शरण में, नमन है उस माँ के चरण में
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥१॥
अरे कर्मों से डरिए ईश्वर से नहीं, ईश्वर माफ कर देता है कर्म नहीं
प्रेम अगर करना ही है तो, मेरे "कन्हा" से करो जिसके विरह में रोने से भी तुम्हारा उद्धार हो जाएगा !!
॥ जय माता दी ॥
नमो नमो दुर्गे सुख करनी. नमो नमो अम्बे दुःख हरनी.!
सारा जहां है जिसकी शरण में, नमन है उस माँ के चरण में
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥१॥
अरे कर्मों से डरिए ईश्वर से नहीं, ईश्वर माफ कर देता है कर्म नहीं
प्रेम अगर करना ही है तो, मेरे "कन्हा" से करो जिसके विरह में रोने से भी तुम्हारा उद्धार हो जाएगा !!
॥ जय माता दी ॥
नमो नमो दुर्गे सुख करनी. नमो नमो अम्बे दुःख हरनी.!