॥ जय माता दी ॥
उसने ही जगत बनाया है कण-कण में वो ही समाया है दुख में भी सुख का अहसास होगा जब सिर पर शिव का साया है
गायत्र्येव परो विष्णुर्गात्र्येव परः शिवः ।गायत्र्येव परो ब्रह्मा गायत्र्येव त्रयी ततः ॥
मन, वचन और कर्म से मनुष्य जिस विषय का बार – बार ध्यान करता है, वही उसे अपनी और आकर्षित कर लेता है, अत: सदैव अच्छे कर्म ही करने चाहिए।
महसूस करके देखा महादेव हर पल मेरे साथ हैं दिखते नहीं कहीं पर सर पर उन्हीं का हाथ हैं
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता| नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ||
॥ जय माता दी ॥
उसने ही जगत बनाया है कण-कण में वो ही समाया है दुख में भी सुख का अहसास होगा जब सिर पर शिव का साया है
गायत्र्येव परो विष्णुर्गात्र्येव परः शिवः ।गायत्र्येव परो ब्रह्मा गायत्र्येव त्रयी ततः ॥
मन, वचन और कर्म से मनुष्य जिस विषय का बार – बार ध्यान करता है, वही उसे अपनी और आकर्षित कर लेता है, अत: सदैव अच्छे कर्म ही करने चाहिए।
महसूस करके देखा महादेव हर पल मेरे साथ हैं दिखते नहीं कहीं पर सर पर उन्हीं का हाथ हैं
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता| नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ||