ॐ नमः शिवाय॥
प्रेम अगर करना ही है तो, मेरे "कन्हा" से करो जिसके विरह में रोने से भी तुम्हारा उद्धार हो जाएगा !!
॥ ॐ ह्रीं दुं दुर्गाय नमः ॥
मन, वचन और कर्म से मनुष्य जिस विषय का बार – बार ध्यान करता है, वही उसे अपनी और आकर्षित कर लेता है, अत: सदैव अच्छे कर्म ही करने चाहिए।
जय जय श्री गणेश रिद्धि सिद्धि के दाता
अहिंसा ही धर्म है, वही जिंदगी का एक रास्ता है।
ॐ नमः शिवाय॥
प्रेम अगर करना ही है तो, मेरे "कन्हा" से करो जिसके विरह में रोने से भी तुम्हारा उद्धार हो जाएगा !!
॥ ॐ ह्रीं दुं दुर्गाय नमः ॥
मन, वचन और कर्म से मनुष्य जिस विषय का बार – बार ध्यान करता है, वही उसे अपनी और आकर्षित कर लेता है, अत: सदैव अच्छे कर्म ही करने चाहिए।
जय जय श्री गणेश रिद्धि सिद्धि के दाता
अहिंसा ही धर्म है, वही जिंदगी का एक रास्ता है।