फिक्र करना ही क्यूँ फिक्र से होता है क्या | भरोसा रखो "श्याम" पर फिर देखो होता है क्या ||

फिक्र करना ही क्यूँ फिक्र से होता है क्या | भरोसा रखो "श्याम" पर फिर देखो होता है क्या ||

Share:

More Like This

ॐ नमः शिवाय॥

प्रेम अगर करना ही है तो, मेरे "कन्हा" से करो जिसके विरह में रोने से भी तुम्हारा उद्धार हो जाएगा !!

॥ ॐ ह्रीं दुं दुर्गाय नमः ॥

मन, वचन और कर्म से मनुष्य जिस विषय का बार – बार ध्यान करता है, वही उसे अपनी और आकर्षित कर लेता है, अत: सदैव अच्छे कर्म ही करने चाहिए।

जय जय श्री गणेश रिद्धि सिद्धि के दाता

अहिंसा ही धर्म है, वही जिंदगी का एक रास्ता है।

ॐ नमः शिवाय॥

प्रेम अगर करना ही है तो, मेरे "कन्हा" से करो जिसके विरह में रोने से भी तुम्हारा उद्धार हो जाएगा !!

॥ ॐ ह्रीं दुं दुर्गाय नमः ॥

मन, वचन और कर्म से मनुष्य जिस विषय का बार – बार ध्यान करता है, वही उसे अपनी और आकर्षित कर लेता है, अत: सदैव अच्छे कर्म ही करने चाहिए।

जय जय श्री गणेश रिद्धि सिद्धि के दाता

अहिंसा ही धर्म है, वही जिंदगी का एक रास्ता है।