स्पर्श वो नहीं जिसने शरीर को पाया हो, स्पर्श तो वो है जिसने आत्मा को गले लगाया हो | जय श्री राधे कृष्णा

स्पर्श वो नहीं जिसने शरीर को पाया हो, स्पर्श तो वो है जिसने आत्मा को गले लगाया हो | जय श्री राधे कृष्णा

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जय जय श्री गणेश रिद्धि सिद्धि के दाता

मैं हर रूप में तुम्हारी मदद के लिए आता हूँ ; मुझे ढूंढो मत केवल पहचानो |

हर आरम्भ का मैं अंत हूँ, हर अंत का मैं आरम्भ हूँ , मैं सत्य हूँ; मैं शिव हूँ; मैं काल हूँ; मैं ही महाकाल हूँ !

ॐ नमः शिवाय॥

जो उपकार करे, उसका प्रत्युपकार करना चाहिए, यही सनातन धर्म है

नमो नमो दुर्गे सुख करनी. नमो नमो अम्बे दुःख हरनी.!

जय जय श्री गणेश रिद्धि सिद्धि के दाता

मैं हर रूप में तुम्हारी मदद के लिए आता हूँ ; मुझे ढूंढो मत केवल पहचानो |

हर आरम्भ का मैं अंत हूँ, हर अंत का मैं आरम्भ हूँ , मैं सत्य हूँ; मैं शिव हूँ; मैं काल हूँ; मैं ही महाकाल हूँ !

ॐ नमः शिवाय॥

जो उपकार करे, उसका प्रत्युपकार करना चाहिए, यही सनातन धर्म है

नमो नमो दुर्गे सुख करनी. नमो नमो अम्बे दुःख हरनी.!