क्या ऐसा नहीं हो सकता हम प्यार मांगे… और तुम गले लगा के कहो, “और कुछ?”
जानते हो मोहब्बत किसे कहते हैं किसी को दिल से चाहना उसे हार जाना और फिर खामोश रहना
अगर हम सुधर गए तो उनका क्या होगा जिनको हमारे पागलपन से प्यार है
प्यार भी कितना अजीब होता है न, वो चाहे कितनी भी तकलीफ दे पर सुकून उसी के पास मिलता है
कहतें हैं कि मोहबत एक बार होती है..पर मैं जब जब उसे देखता हूँ..मुझे हर बार होती है॥
सुना है तुम ज़िद्दी बहुत हो, मुझे भी अपनी जिद्द बना लो !!
क्या ऐसा नहीं हो सकता हम प्यार मांगे… और तुम गले लगा के कहो, “और कुछ?”
जानते हो मोहब्बत किसे कहते हैं किसी को दिल से चाहना उसे हार जाना और फिर खामोश रहना
अगर हम सुधर गए तो उनका क्या होगा जिनको हमारे पागलपन से प्यार है
प्यार भी कितना अजीब होता है न, वो चाहे कितनी भी तकलीफ दे पर सुकून उसी के पास मिलता है
कहतें हैं कि मोहबत एक बार होती है..पर मैं जब जब उसे देखता हूँ..मुझे हर बार होती है॥
सुना है तुम ज़िद्दी बहुत हो, मुझे भी अपनी जिद्द बना लो !!