जहां बरस रहा है मेरे महाकाल का प्यार वो दरबार भी किसी जन्नत से कम नही..!! हर-हर महादेव शिवशंकर
गरज उठे गगन सारा, समंदर छोड़े अपना किनारा , हिल जाये जहान सारा, जब गूंजे महाकाल का नारा ।।।
भोले तूने तो सारी दुनिया तारी हैं, कभी मेरे सर पे भी धर के हाथ, कह दे चल बेटा आज तेरी बारी हैं
नशा उनके भक्ति की अनंतकाल तक होगी, मोहब्बत अब हमें अपने महाकाल से होगी
मंदिर के बाहर खड़े भक्त से महाकाल कहते है, बेझिझक भीतर आइए, “पाप” करके आप थक गये होंगे । ?Jai Mahakal?
हैसियत मेरी छोटी है पर, मन मेरा शिवाला है । करम तो मैं करता जाऊँ, क्योंकि साथ मेरे डमरूवाला है ।
जहां बरस रहा है मेरे महाकाल का प्यार वो दरबार भी किसी जन्नत से कम नही..!! हर-हर महादेव शिवशंकर
गरज उठे गगन सारा, समंदर छोड़े अपना किनारा , हिल जाये जहान सारा, जब गूंजे महाकाल का नारा ।।।
भोले तूने तो सारी दुनिया तारी हैं, कभी मेरे सर पे भी धर के हाथ, कह दे चल बेटा आज तेरी बारी हैं
नशा उनके भक्ति की अनंतकाल तक होगी, मोहब्बत अब हमें अपने महाकाल से होगी
मंदिर के बाहर खड़े भक्त से महाकाल कहते है, बेझिझक भीतर आइए, “पाप” करके आप थक गये होंगे । ?Jai Mahakal?
हैसियत मेरी छोटी है पर, मन मेरा शिवाला है । करम तो मैं करता जाऊँ, क्योंकि साथ मेरे डमरूवाला है ।