जिनके रोम-रोम में शिव हैं वही विष पिया करते हैं , जमाना उन्हें क्या जलाएगा , जो श्रृंगार ही अंगार से किया करते हैं.
अच्छी बात ये है कि मैं इंसान हूं, और उससे भी अच्छी बात ये है कि मैं महाकाल का भक्त हूं!!
नही पता कौन हूँ मैं और कहा मुझे जाना हैं, महादेव ही मेरी मँजिल हैं और महाकाल का दर ही मेरा ठिकाना हैं।
मंदिर के बाहर खड़े भक्त से महाकाल कहते है, बेझिझक भीतर आइए, “पाप” करके आप थक गये होंगे । ?Jai Mahakal?
वो समंदर ही क्या जिसका कोई किनारा न हो, वो इबादत ही क्या जिसमे महाकाल नाम तेरा न हो,
भस्म को ललाट पे लगाया करते हैं, गले में मूँड माला, साँपों का डेरा सजाया करते है, हम भक्त है उनके जो ताण्डव मचाया करते है ।
जिनके रोम-रोम में शिव हैं वही विष पिया करते हैं , जमाना उन्हें क्या जलाएगा , जो श्रृंगार ही अंगार से किया करते हैं.
अच्छी बात ये है कि मैं इंसान हूं, और उससे भी अच्छी बात ये है कि मैं महाकाल का भक्त हूं!!
नही पता कौन हूँ मैं और कहा मुझे जाना हैं, महादेव ही मेरी मँजिल हैं और महाकाल का दर ही मेरा ठिकाना हैं।
मंदिर के बाहर खड़े भक्त से महाकाल कहते है, बेझिझक भीतर आइए, “पाप” करके आप थक गये होंगे । ?Jai Mahakal?
वो समंदर ही क्या जिसका कोई किनारा न हो, वो इबादत ही क्या जिसमे महाकाल नाम तेरा न हो,
भस्म को ललाट पे लगाया करते हैं, गले में मूँड माला, साँपों का डेरा सजाया करते है, हम भक्त है उनके जो ताण्डव मचाया करते है ।