महाकाल वो हस्ती है, जिससे मिलने को दुनियाँ तरसती है और हम उसी महेफिल में रोज बैठा करते है ।
यह कलयुग है यहाँ ताज अच्छाई को नही बुराई को मिलता है, लेकिन हम तो बाबा महाकाल के दीवाने है , ताज के नही रुद्राक्ष के दीवाने है.
भोले तूने तो सारी दुनिया तारी हैं, कभी मेरे सर पे भी धर के हाथ, कह दे चल बेटा आज तेरी बारी हैं
झुकता नही शिव भक्त किसी के आगे, वो काल भी क्या करेगा महाकाल के आगे।
दिखावे की मोहब्बत से दूर रहता हूँ, इसलिये मैं महाकाल के नशे में चूर रहता हूँ ।
नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांग रागाय महेश्वराय। नित्याय शुद्धाय दिगंबराय तस्मे न काराय नमः शिवायः।।
महाकाल वो हस्ती है, जिससे मिलने को दुनियाँ तरसती है और हम उसी महेफिल में रोज बैठा करते है ।
यह कलयुग है यहाँ ताज अच्छाई को नही बुराई को मिलता है, लेकिन हम तो बाबा महाकाल के दीवाने है , ताज के नही रुद्राक्ष के दीवाने है.
भोले तूने तो सारी दुनिया तारी हैं, कभी मेरे सर पे भी धर के हाथ, कह दे चल बेटा आज तेरी बारी हैं
झुकता नही शिव भक्त किसी के आगे, वो काल भी क्या करेगा महाकाल के आगे।
दिखावे की मोहब्बत से दूर रहता हूँ, इसलिये मैं महाकाल के नशे में चूर रहता हूँ ।
नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांग रागाय महेश्वराय। नित्याय शुद्धाय दिगंबराय तस्मे न काराय नमः शिवायः।।