एक ही चौखट पे सर झुके तो सुकून मिलता है, भटक जाते हैं वे लोग जिनके सैकड़ो रब होते हैं ?जय श्री महाकाल?
ना पूछो मुझसे मेरी पहचान, मैं तो भस्मधारी हूँ, भस्म से होता जिनका श्रृंगार मैं उस महाकाल का पुजारी हूँ ।
करूँ क्यों फ़िक्र कि मौत के बाद जगह कहाँ मिलेगी जहाँ होगी मेरे महादेव की महफिल मेरी रूह वहाँ मिलेगी.
माथे का? तिलक कभी ?हटेगा नही, और जब तक जिन्दा हूँ,? तब तक महाकाल ⚡का नाम मुँह से मिटेगा नही।
महाकाल कि महेफील में बैठा किजिए साहब । बादशाहत का अंदाज़ खुद ब खुद आ जायेगा।। जय श्री महाकाल
सारा जहाँ है जिसकी शरण में नमन है उस शिव जी के चरण में बने उस शिवजी के चरणों की धुल आओ मिल कर चढ़ाये हम श्रद्धा के फूल
एक ही चौखट पे सर झुके तो सुकून मिलता है, भटक जाते हैं वे लोग जिनके सैकड़ो रब होते हैं ?जय श्री महाकाल?
ना पूछो मुझसे मेरी पहचान, मैं तो भस्मधारी हूँ, भस्म से होता जिनका श्रृंगार मैं उस महाकाल का पुजारी हूँ ।
करूँ क्यों फ़िक्र कि मौत के बाद जगह कहाँ मिलेगी जहाँ होगी मेरे महादेव की महफिल मेरी रूह वहाँ मिलेगी.
माथे का? तिलक कभी ?हटेगा नही, और जब तक जिन्दा हूँ,? तब तक महाकाल ⚡का नाम मुँह से मिटेगा नही।
महाकाल कि महेफील में बैठा किजिए साहब । बादशाहत का अंदाज़ खुद ब खुद आ जायेगा।। जय श्री महाकाल
सारा जहाँ है जिसकी शरण में नमन है उस शिव जी के चरण में बने उस शिवजी के चरणों की धुल आओ मिल कर चढ़ाये हम श्रद्धा के फूल