पता नहीं क्या बात है तुज में जो हर पल तुम्हे सोच कर भी मन नहीं भरता है
मुस्कुरा जाता हूँ अक्सर गुस्से में भी तेरा नाम सुनकर, तेरा नाम से इतनी मोहब्बत ही तो सोच तुझसे कितनी होगी
बहुत गौर से देखने पर जिंदगी को जाना मैंने...दिल से बड़ा दुश्मन पूरे जमाने में नहीं है
इश्क न हुआ कोहरा हो जैसे....तुम्हारे सिवा कुछ दिखता ही नहीं....
जब तुम मेरी फिकर करते हो न तब जिन्दगी जनत सी महेसुस होती है
उसकी मुहब्बत का सिलसिला भी क्या अजीब है, अपना भी नहीं बनाती और किसी का होने भी नहीं देती
पता नहीं क्या बात है तुज में जो हर पल तुम्हे सोच कर भी मन नहीं भरता है
मुस्कुरा जाता हूँ अक्सर गुस्से में भी तेरा नाम सुनकर, तेरा नाम से इतनी मोहब्बत ही तो सोच तुझसे कितनी होगी
बहुत गौर से देखने पर जिंदगी को जाना मैंने...दिल से बड़ा दुश्मन पूरे जमाने में नहीं है
इश्क न हुआ कोहरा हो जैसे....तुम्हारे सिवा कुछ दिखता ही नहीं....
जब तुम मेरी फिकर करते हो न तब जिन्दगी जनत सी महेसुस होती है
उसकी मुहब्बत का सिलसिला भी क्या अजीब है, अपना भी नहीं बनाती और किसी का होने भी नहीं देती