ऐसा-वैसा नहीं बेहद और बेशुमार चाहिये... मुझे तुम... तुम्हारा वक्त... और तुम्हारा प्यार चाहिये...

ऐसा-वैसा नहीं बेहद और बेशुमार चाहिये... मुझे तुम... तुम्हारा वक्त... और तुम्हारा प्यार चाहिये...

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प्यार वही हैं ... जो दूर रहकर भी महसूस होता हैं

कमाल हैं ना ...? सांसे मेरी जिंदगी मेरी मोहब्बत मेरी, मगर जीने के लिये जरूरत तेरी

तुम मेरी वो किताब हो, जिसका हर लफ्ज़ मुझे ज़बानी याद है

एक दिन तुम्हे एहसास होगा कि क्या था मैं तुम्हारे लिए ! पर तब तक मैं तुम्हारी ज़िन्दगी से बहुत दूर जा चुका हूँगा

अगर हम सुधर गए तो उनका क्या होगा जिनको हमारे पागलपन से प्यार है

मुहब्बत में झुकना कोई अजीब बात नहीं; चमकता सूरज भी तो ढल जाता है चाँद के लिए।

प्यार वही हैं ... जो दूर रहकर भी महसूस होता हैं

कमाल हैं ना ...? सांसे मेरी जिंदगी मेरी मोहब्बत मेरी, मगर जीने के लिये जरूरत तेरी

तुम मेरी वो किताब हो, जिसका हर लफ्ज़ मुझे ज़बानी याद है

एक दिन तुम्हे एहसास होगा कि क्या था मैं तुम्हारे लिए ! पर तब तक मैं तुम्हारी ज़िन्दगी से बहुत दूर जा चुका हूँगा

अगर हम सुधर गए तो उनका क्या होगा जिनको हमारे पागलपन से प्यार है

मुहब्बत में झुकना कोई अजीब बात नहीं; चमकता सूरज भी तो ढल जाता है चाँद के लिए।