ग़ालिब ने खूब कहा है - ऐ चाँद तू किस मज़हब का है, ईद भी तेरी और करवाचौथ भी तेरा
बस तुम रूठा मत करो कभी मुझसे, क्यू की सुना है जान रूठ जाए तो कोई जी नहीं पता |
नशा कोई भी हो जान लेवा ही होता है ..यकीन तब हुआ जब तेरी लत लगी...??
मोहब्बत ज़िंदगी बदल देती है, मिल जाए तो भी ना मिले तो भी
एक तू और तेरा प्यार, मेरे लिऐ काफी है मेरे यारा...
कितनी ही खूबसूरत क्यों न हो तुम.. पर मैं जानता हूँ.. असली निखार मेरी तारीफ से ही आता है..
ग़ालिब ने खूब कहा है - ऐ चाँद तू किस मज़हब का है, ईद भी तेरी और करवाचौथ भी तेरा
बस तुम रूठा मत करो कभी मुझसे, क्यू की सुना है जान रूठ जाए तो कोई जी नहीं पता |
नशा कोई भी हो जान लेवा ही होता है ..यकीन तब हुआ जब तेरी लत लगी...??
मोहब्बत ज़िंदगी बदल देती है, मिल जाए तो भी ना मिले तो भी
एक तू और तेरा प्यार, मेरे लिऐ काफी है मेरे यारा...
कितनी ही खूबसूरत क्यों न हो तुम.. पर मैं जानता हूँ.. असली निखार मेरी तारीफ से ही आता है..