छूकर भी जिसे छू न सके, वो चाहत होती हैं इश्क़, कर दे फना जो रूह को, वो इबादत होती हैं इश्क़
नजर चाहती है दीदार करना, दिल चाहता है तुम्हें प्यार करना...
तेरे चेहरे में ऐसा क्या है आखिर, जिसे बरसों से देखा जा रहा है
सच्चा प्यार ईश्वर कि तरह होता है, जिसके बारे में बातें तो सभी करते हैं लेकिन महसूस कुछ ही लोगों ने किया होता है
सच्चे इश्क में अल्फाज़ से ज्यादा एहसास की एहमियत होती है
मुलाकात जरुरी हैं, अगर रिश्ते निभाने हो, वरना लगा कर भूल जाने से पौधे भी सुख जाते हैं
छूकर भी जिसे छू न सके, वो चाहत होती हैं इश्क़, कर दे फना जो रूह को, वो इबादत होती हैं इश्क़
नजर चाहती है दीदार करना, दिल चाहता है तुम्हें प्यार करना...
तेरे चेहरे में ऐसा क्या है आखिर, जिसे बरसों से देखा जा रहा है
सच्चा प्यार ईश्वर कि तरह होता है, जिसके बारे में बातें तो सभी करते हैं लेकिन महसूस कुछ ही लोगों ने किया होता है
सच्चे इश्क में अल्फाज़ से ज्यादा एहसास की एहमियत होती है
मुलाकात जरुरी हैं, अगर रिश्ते निभाने हो, वरना लगा कर भूल जाने से पौधे भी सुख जाते हैं