जो इश्क़ दूरियों में भी बरकरार रहे वो, इश्क़ ही कुछ और होता है.

जो इश्क़ दूरियों में भी बरकरार रहे वो, इश्क़ ही कुछ और होता है.

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ए इश्क़, तू ही बता, मैं तेरा अब, क्या हश्र करूँ - दिल जलाऊँ, आँखों से बहाऊँ, या रूह में क़ैद करूँ

ना चाँद चाहिए ना फलक चाहिए, मुझे बस तेरी एक झलक चाहिए

ऐसा नही है कि मुझमे कोई ‘ऐब’ नही है.. पर सच कहता हूँ मुझमें ‘फरेब’ नहीं है

बुजदिल हें वो लोग जो मोहब्बत नहीं करते, बहुत हौसला चाहिए बर्बाद होने के लिए

छूकर भी जिसे छू न सके, वो चाहत होती हैं इश्क़, कर दे फना जो रूह को, वो इबादत होती हैं इश्क़

खुद ही दे जाओगे तो बेहतर है..!वरना हम दिल चुरा भी लेते हैं..!

ए इश्क़, तू ही बता, मैं तेरा अब, क्या हश्र करूँ - दिल जलाऊँ, आँखों से बहाऊँ, या रूह में क़ैद करूँ

ना चाँद चाहिए ना फलक चाहिए, मुझे बस तेरी एक झलक चाहिए

ऐसा नही है कि मुझमे कोई ‘ऐब’ नही है.. पर सच कहता हूँ मुझमें ‘फरेब’ नहीं है

बुजदिल हें वो लोग जो मोहब्बत नहीं करते, बहुत हौसला चाहिए बर्बाद होने के लिए

छूकर भी जिसे छू न सके, वो चाहत होती हैं इश्क़, कर दे फना जो रूह को, वो इबादत होती हैं इश्क़

खुद ही दे जाओगे तो बेहतर है..!वरना हम दिल चुरा भी लेते हैं..!