छूकर भी जिसे छू न सके, वो चाहत होती हैं इश्क़, कर दे फना जो रूह को, वो इबादत होती हैं इश्क़

छूकर भी जिसे छू न सके, वो चाहत होती हैं इश्क़, कर दे फना जो रूह को, वो इबादत होती हैं इश्क़

Share:

More Like This

ना कोई शिकायत, ना कोई ग़म.... तेरे ही थे ओर तेरे ही रहेगे हम…

मेरा दिल सिर्फ तुम्हारे लिए धड़कता है

मेरे इस दिल को तुम ही रख लो ना बड़ी फ़िक्र रहती है इसे तुम्हारी

“अगर प्यार है तो शक़ कैसा …अगर नहीं है तो हक़ कैसा

ऐ ईश्क सुना था के… तु अंन्धा है फिर मेरे धर का राश्ता तुजे कीसने बताया

मेरे दिल से उसकी हर गलती माफ़ हो जाती है, जब वो मुस्कुरा के पूछती है, नाराज हो क्या.?

ना कोई शिकायत, ना कोई ग़म.... तेरे ही थे ओर तेरे ही रहेगे हम…

मेरा दिल सिर्फ तुम्हारे लिए धड़कता है

मेरे इस दिल को तुम ही रख लो ना बड़ी फ़िक्र रहती है इसे तुम्हारी

“अगर प्यार है तो शक़ कैसा …अगर नहीं है तो हक़ कैसा

ऐ ईश्क सुना था के… तु अंन्धा है फिर मेरे धर का राश्ता तुजे कीसने बताया

मेरे दिल से उसकी हर गलती माफ़ हो जाती है, जब वो मुस्कुरा के पूछती है, नाराज हो क्या.?