शिखर तक पहुँचने के लिए ताकत चाहिए होती है, चाहे वो माउन्ट एवरेस्ट का शिखर हो या आपके पेशे का।
किसी भी काम में अगर आप अपना 100% देंगे… तो आप सफल हो जाएंगे।
थका हु .. पर जिमजाने से मुझे कोई रोक नहीं सकता …
मंजिल चाहे कितनी भी उंची क्यो ना हो दोस्तो! रास्ते हमेशा पेरो के नीचे होते हे।
अच्छे दिनों में कसरत और बुरे दिनों में कठिन कसरत।…
मुझे गर्व महसूस होता है … जिम जाने में
शिखर तक पहुँचने के लिए ताकत चाहिए होती है, चाहे वो माउन्ट एवरेस्ट का शिखर हो या आपके पेशे का।
किसी भी काम में अगर आप अपना 100% देंगे… तो आप सफल हो जाएंगे।
थका हु .. पर जिमजाने से मुझे कोई रोक नहीं सकता …
मंजिल चाहे कितनी भी उंची क्यो ना हो दोस्तो! रास्ते हमेशा पेरो के नीचे होते हे।
अच्छे दिनों में कसरत और बुरे दिनों में कठिन कसरत।…
मुझे गर्व महसूस होता है … जिम जाने में