आपका शरीर … आपकी जीवन शैली का प्रतिबिंब है।

आपका शरीर … आपकी जीवन शैली का प्रतिबिंब है।

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अच्छे दिनों में कसरत और बुरे दिनों में कठिन कसरत।…

चलता रहूँगा पथ पर, चलने में माहीर हो जाऊँगा, या तो मंज़िल मिल जायेगी, या अच्छा मुसाफिर बन जाऊँगा ।

रुकने का नहीं … चलते रहो।…

अब आलस नहीं…. सिर्फ जिम

हिम्मत बताई नहि, दिखाई जाती है.

शिखर तक पहुँचने के लिए ताकत चाहिए होती है, चाहे वो माउन्ट एवरेस्ट का शिखर हो या आपके पेशे का।

अच्छे दिनों में कसरत और बुरे दिनों में कठिन कसरत।…

चलता रहूँगा पथ पर, चलने में माहीर हो जाऊँगा, या तो मंज़िल मिल जायेगी, या अच्छा मुसाफिर बन जाऊँगा ।

रुकने का नहीं … चलते रहो।…

अब आलस नहीं…. सिर्फ जिम

हिम्मत बताई नहि, दिखाई जाती है.

शिखर तक पहुँचने के लिए ताकत चाहिए होती है, चाहे वो माउन्ट एवरेस्ट का शिखर हो या आपके पेशे का।