भर्री महफ़िल में दोस्ती का ज़िकर हुआ, हमने तो सिर्फ आपकी और देखा और लोग वाह वाह कहने लगे

भर्री महफ़िल में दोस्ती का ज़िकर हुआ, हमने तो सिर्फ आपकी और देखा और लोग वाह वाह कहने लगे

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ना कोई शिकायत, ना कोई ग़म.... तेरे ही थे ओर तेरे ही रहेगे हम…

मेरी मुस्कान के लिये काफ़ी है याद तेरी

मेरी आत्मकथा.... सिर्फ तुम्हारी कहानी है....

सफर वहीं तक है जहाँ तक तुम हो, नजर वहीं तक है जहाँ तक तुम हो, हजारों फूल देखे हैं इस गुलशन में मगर, खुशबू वहीं तक है जहाँ तक तुम हो।

सुना है तुम ज़िद्दी बहुत हो, मुझे भी अपनी जिद्द बना लो !!

बस जाते हैं दिल में इजाज़त लिए बगैर, वो जिन्हें हम ज़िन्दगी भर पा नहीं सकते |

ना कोई शिकायत, ना कोई ग़म.... तेरे ही थे ओर तेरे ही रहेगे हम…

मेरी मुस्कान के लिये काफ़ी है याद तेरी

मेरी आत्मकथा.... सिर्फ तुम्हारी कहानी है....

सफर वहीं तक है जहाँ तक तुम हो, नजर वहीं तक है जहाँ तक तुम हो, हजारों फूल देखे हैं इस गुलशन में मगर, खुशबू वहीं तक है जहाँ तक तुम हो।

सुना है तुम ज़िद्दी बहुत हो, मुझे भी अपनी जिद्द बना लो !!

बस जाते हैं दिल में इजाज़त लिए बगैर, वो जिन्हें हम ज़िन्दगी भर पा नहीं सकते |