भर्री महफ़िल में दोस्ती का ज़िकर हुआ, हमने तो सिर्फ आपकी और देखा और लोग वाह वाह कहने लगे

भर्री महफ़िल में दोस्ती का ज़िकर हुआ, हमने तो सिर्फ आपकी और देखा और लोग वाह वाह कहने लगे

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जानते हो मोहब्बत किसे कहते हैं किसी को दिल से चाहना उसे हार जाना और फिर खामोश रहना

छूकर भी जिसे छू न सके, वो चाहत होती हैं इश्क़, कर दे फना जो रूह को, वो इबादत होती हैं इश्क़

हम तो मोहबत के नाम से भी अनजान थे, एक शख्स की चाहत ने पागल बना दिया

कोई भी दीवारें मुझे तुमसे मिलने से ना रोक पाती, अगर तू मेरे साथ होती तो

मिलावट का जमाना है साहिब,,,कभी हमारी हां में हां भी मिला दिया करो...

प्यार भी कितना अजीब होता है न , वो चाहे कितनी भी तकलीफ दे पर सुकून उसी के पास मिलता है

जानते हो मोहब्बत किसे कहते हैं किसी को दिल से चाहना उसे हार जाना और फिर खामोश रहना

छूकर भी जिसे छू न सके, वो चाहत होती हैं इश्क़, कर दे फना जो रूह को, वो इबादत होती हैं इश्क़

हम तो मोहबत के नाम से भी अनजान थे, एक शख्स की चाहत ने पागल बना दिया

कोई भी दीवारें मुझे तुमसे मिलने से ना रोक पाती, अगर तू मेरे साथ होती तो

मिलावट का जमाना है साहिब,,,कभी हमारी हां में हां भी मिला दिया करो...

प्यार भी कितना अजीब होता है न , वो चाहे कितनी भी तकलीफ दे पर सुकून उसी के पास मिलता है