जानते हो मोहब्बत किसे कहते हैं किसी को दिल से चाहना उसे हार जाना और फिर खामोश रहना
तुम मेरी वो किताब हो, जिसका हर लफ्ज़ मुझे ज़बानी याद है
काश मोहब्बत में भी चुनाव होते, गजब का भाषण देते तुम्हें पाने के लिए.
जिनकी संगत मैं ख़ामोश संवाद होते है, अक्सर वो रिश्ते बहुत ही ख़ास होते हैं।
गर्मी तो बोहत पढ़ रही है। फिर भी उनका दिल पिघलने का नाम ही नहीं ले रहा ।
हम दोनों को कोई भी बीमारी नही है... फिर भी तु मेरी और मैं तेरी दवा हूँ
जानते हो मोहब्बत किसे कहते हैं किसी को दिल से चाहना उसे हार जाना और फिर खामोश रहना
तुम मेरी वो किताब हो, जिसका हर लफ्ज़ मुझे ज़बानी याद है
काश मोहब्बत में भी चुनाव होते, गजब का भाषण देते तुम्हें पाने के लिए.
जिनकी संगत मैं ख़ामोश संवाद होते है, अक्सर वो रिश्ते बहुत ही ख़ास होते हैं।
गर्मी तो बोहत पढ़ रही है। फिर भी उनका दिल पिघलने का नाम ही नहीं ले रहा ।
हम दोनों को कोई भी बीमारी नही है... फिर भी तु मेरी और मैं तेरी दवा हूँ