लिख दू तो लफ्ज़ तुम हो, सोच लू तो ख्याल तुम हो, मांग लू तो मन्नत तुम हो, और चाह लू तो मोहोब्बत भी तुम ही हो
तू मिले या न मिले ये तो मुक़द्दर की बात है मगर सुकून बहुत मिलता है तुझे अपना सोच कर
“अगर प्यार है तो शक़ कैसा …अगर नहीं है तो हक़ कैसा
ज़िन्दगी के हर मोड़ पर तुम साथ रहना, चाहे दूर रहो पर हमेशा दिल के पास रहना
मोहब्बत ज़िंदगी बदल देती है, मिल जाए तो भी ना मिले तो भी
जब तुम मेरी फिकर करते हो न तब जिन्दगी जनत सी महेसुस होती है
लिख दू तो लफ्ज़ तुम हो, सोच लू तो ख्याल तुम हो, मांग लू तो मन्नत तुम हो, और चाह लू तो मोहोब्बत भी तुम ही हो
तू मिले या न मिले ये तो मुक़द्दर की बात है मगर सुकून बहुत मिलता है तुझे अपना सोच कर
“अगर प्यार है तो शक़ कैसा …अगर नहीं है तो हक़ कैसा
ज़िन्दगी के हर मोड़ पर तुम साथ रहना, चाहे दूर रहो पर हमेशा दिल के पास रहना
मोहब्बत ज़िंदगी बदल देती है, मिल जाए तो भी ना मिले तो भी
जब तुम मेरी फिकर करते हो न तब जिन्दगी जनत सी महेसुस होती है