महाकाल के भक्तों से पंगा, और भरी महेफिल में दंगा मत करना वर्ना करूँगा चौराहे पे नंगा और भेजूँगा तेरी अस्थियों को गंगा । ?Jai Shree Mahakal?

महाकाल के भक्तों से पंगा, और भरी महेफिल में दंगा मत करना वर्ना करूँगा चौराहे पे नंगा और भेजूँगा तेरी अस्थियों को गंगा । ?Jai Shree Mahakal?

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हैसियत मेरी छोटी है पर, मन मेरा शिवाला है । करम तो मैं करता जाऊँ, क्योंकि साथ मेरे डमरूवाला है ।

ना पूछो मुझसे मेरी पहचान, मैं तो भस्मधारी हूँ, भस्म से होता जिनका श्रृंगार मैं उस महाकाल का पुजारी हूँ ।

जिनके रोम-रोम में शिव है, वहीं विष पिया करते हैं, जमाना उन्हें क्या जलायेंगा, जो श्रृंगार ही अंगार से करते है । ?Har Har Mahadev?

दिखावे की मोहब्बत से दूर रहता हूँ, इसलिये मैं महाकाल के नशे में चूर रहता हूँ ।

नही पता कौन हूँ मैं और कहा मुझे जाना हैं, महादेव ही मेरी मँजिल हैं और महाकाल का दर ही मेरा ठिकाना हैं।

पैसा नही है मेरी जेब मे सिर्फ महाकाल की तस्वीर है। सुबह शाम उसे देखता हूँ क्योंकि वो ही मेरी तकदीर है।।

हैसियत मेरी छोटी है पर, मन मेरा शिवाला है । करम तो मैं करता जाऊँ, क्योंकि साथ मेरे डमरूवाला है ।

ना पूछो मुझसे मेरी पहचान, मैं तो भस्मधारी हूँ, भस्म से होता जिनका श्रृंगार मैं उस महाकाल का पुजारी हूँ ।

जिनके रोम-रोम में शिव है, वहीं विष पिया करते हैं, जमाना उन्हें क्या जलायेंगा, जो श्रृंगार ही अंगार से करते है । ?Har Har Mahadev?

दिखावे की मोहब्बत से दूर रहता हूँ, इसलिये मैं महाकाल के नशे में चूर रहता हूँ ।

नही पता कौन हूँ मैं और कहा मुझे जाना हैं, महादेव ही मेरी मँजिल हैं और महाकाल का दर ही मेरा ठिकाना हैं।

पैसा नही है मेरी जेब मे सिर्फ महाकाल की तस्वीर है। सुबह शाम उसे देखता हूँ क्योंकि वो ही मेरी तकदीर है।।