लोग पूछते हैं “कौन-सी दुनिया में जीते हो ?” हमने भी कह दिया “महाकाल कि भक्ति में दुनिया कहा नजर आती है ?” जय महाकाल
माया को चाहने वाला बिखर जाता है, और महाकाल को चाहने वाला निखर जाता है ।
जिनके रोम-रोम में शिव है, वहीं विष पिया करते हैं, जमाना उन्हें क्या जलायेंगा, जो श्रृंगार ही अंगार से करते है । ?Har Har Mahadev?
झुकता नही शिव भक्त किसी के आगे, वो काल भी क्या करेगा महाकाल के आगे।
करूँ क्यों फ़िक्र कि मौत के बाद जगह कहाँ मिलेगी जहाँ होगी मेरे महादेव की महफिल मेरी रूह वहाँ मिलेगी.
अनजान हु अभी, धीरे धीरे सीख़ जाऊंगा पर किसी के सामने झुक कर, पहचान नहीं बनाऊंगा
लोग पूछते हैं “कौन-सी दुनिया में जीते हो ?” हमने भी कह दिया “महाकाल कि भक्ति में दुनिया कहा नजर आती है ?” जय महाकाल
माया को चाहने वाला बिखर जाता है, और महाकाल को चाहने वाला निखर जाता है ।
जिनके रोम-रोम में शिव है, वहीं विष पिया करते हैं, जमाना उन्हें क्या जलायेंगा, जो श्रृंगार ही अंगार से करते है । ?Har Har Mahadev?
झुकता नही शिव भक्त किसी के आगे, वो काल भी क्या करेगा महाकाल के आगे।
करूँ क्यों फ़िक्र कि मौत के बाद जगह कहाँ मिलेगी जहाँ होगी मेरे महादेव की महफिल मेरी रूह वहाँ मिलेगी.
अनजान हु अभी, धीरे धीरे सीख़ जाऊंगा पर किसी के सामने झुक कर, पहचान नहीं बनाऊंगा