जहाँ पर आकर लोगों की नवाबी ख़त्म हो जाती है, बस वहीं से महाकाल के दीवानों की बादशाही शुरू होती है..!
हम दुनिया? से अलग नहीं, हमारी? दुनिया ही अलग है !! ? जय श्री महाकाल
कर्ता करे न कर सके, शिव करे सो होय तीन लोक नौ खंड में, महाकाल से बड़ा न कोय ॐ नमः शिवाय:
क्या करूँगा मैं अमीर बन कर, मेरा महाकाल तो फकीरो का दीवाना है..!
जिनके रोम-रोम में शिव हैं वही विष पिया करते हैं , जमाना उन्हें क्या जलाएगा , जो श्रृंगार ही अंगार से किया करते हैं.
हीरे मोती और जेवरात तो सेठ लोग पहनते है हम तो भोले के भक्त है इसीलिए रुद्राक्ष पहनते है
जहाँ पर आकर लोगों की नवाबी ख़त्म हो जाती है, बस वहीं से महाकाल के दीवानों की बादशाही शुरू होती है..!
हम दुनिया? से अलग नहीं, हमारी? दुनिया ही अलग है !! ? जय श्री महाकाल
कर्ता करे न कर सके, शिव करे सो होय तीन लोक नौ खंड में, महाकाल से बड़ा न कोय ॐ नमः शिवाय:
क्या करूँगा मैं अमीर बन कर, मेरा महाकाल तो फकीरो का दीवाना है..!
जिनके रोम-रोम में शिव हैं वही विष पिया करते हैं , जमाना उन्हें क्या जलाएगा , जो श्रृंगार ही अंगार से किया करते हैं.
हीरे मोती और जेवरात तो सेठ लोग पहनते है हम तो भोले के भक्त है इसीलिए रुद्राक्ष पहनते है