लड़ें वो वीर जवानों की तरह, ठंडा खून फ़ौलाद हुआ, मरते-मरते भी मार गिराए, तभी तो देश आज़ाद हुआ…
फंदे से मोहब्बत थी हम वतन के मतवालो को।
खून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्किल में है -अशफाकुल्लाह खा
लिपट कर बदन कई तिरंगे में आज भी आते हैं, यूँ ही नहीं दोस्तों हम ये पर्व मनाते हैं।
चिंगारी आजादी की सुलगी मेरे जश्न में हैं, इन्कलाब की ज्वालाएं लिपटी मेरे बदन में हैं, मौत जहाँ जन्नत हो ये बात मेरे वतन में हैं, कुर्बानी का जज्बा जिन्दा मेरे कफन में हैं…
जो भरा नहीं है भावों से बहती जिसमें रसधार नहीं वह हृदय नहीं वो पत्थर है जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं
लड़ें वो वीर जवानों की तरह, ठंडा खून फ़ौलाद हुआ, मरते-मरते भी मार गिराए, तभी तो देश आज़ाद हुआ…
फंदे से मोहब्बत थी हम वतन के मतवालो को।
खून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्किल में है -अशफाकुल्लाह खा
लिपट कर बदन कई तिरंगे में आज भी आते हैं, यूँ ही नहीं दोस्तों हम ये पर्व मनाते हैं।
चिंगारी आजादी की सुलगी मेरे जश्न में हैं, इन्कलाब की ज्वालाएं लिपटी मेरे बदन में हैं, मौत जहाँ जन्नत हो ये बात मेरे वतन में हैं, कुर्बानी का जज्बा जिन्दा मेरे कफन में हैं…
जो भरा नहीं है भावों से बहती जिसमें रसधार नहीं वह हृदय नहीं वो पत्थर है जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं