उन आँखों की दो बूंदों से सातों सागर हारे हैं, जब मेहँदी वाले हाथों ने मंगल-सूत्र उतारे हैं।

उन आँखों की दो बूंदों से सातों सागर हारे हैं, जब मेहँदी वाले हाथों ने मंगल-सूत्र उतारे हैं।

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मैं हनुमान हूँ इसका ये मेरे श्री राम हैं छाती चीरकर देख लो अंदर बैठा हिंदुस्तान है

दे सलामी इस तिरंगे को जिस से तेरी शान हैं, सर हमेशा ऊँचा रखना इसका.. जब तक दिल में जान हैं।

तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूँगा

नेताजी सुभाष चंद्र बोस

देशभक्तों से ही देश की शान है देशभक्तों से ही देश का मान है हम उस देश के फूल हैं यारों जिस देश का नाम हिंदुस्तान है

जश्न आज़ादी का मुबारक हो देश वालो को|

ये अगस्त ही वो महीना है तो आजादी की याद दिलाता है उन देशभक्तों की याद दिलाता है जो देश के लिए घर परिवार सब छोड़कर बलिदान हो गये जय हिन्द….

मैं हनुमान हूँ इसका ये मेरे श्री राम हैं छाती चीरकर देख लो अंदर बैठा हिंदुस्तान है

दे सलामी इस तिरंगे को जिस से तेरी शान हैं, सर हमेशा ऊँचा रखना इसका.. जब तक दिल में जान हैं।

तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूँगा

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