चलो फिर से आज वह नज़ारा याद कर ले, शहीदों के दिल में थी वो ज्वाला याद करले, जिसमे बहकर आज़ादी पहुंची थी किनारे पे देशभक्तो के खून की वो धारा याद करले..||

चलो फिर से आज वह नज़ारा याद कर ले, शहीदों के दिल में थी वो ज्वाला याद करले, जिसमे बहकर आज़ादी पहुंची थी किनारे पे देशभक्तो के खून की वो धारा याद करले..||

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ये मत पूछो की वतन ने तुमको क्या दिया ? ये सोचो कि तुमने वतन के लिए क्या किया ?

चलो फिर से खुद को जागते हैं अनुशासन का डंडा फिर घुमाते हैं सुनहरा रंग है शहीदों के लहू से ऐसे शहीदों को हम सब सर झुकाते हैं

लहराएगा तिरंगा अब सारे आसमान पर भारत का ही नाम होगा सबकी जुबान पर ले लेंगे उसकी जान या खेलेंगे अपनी जान पर कोई जो उठाएगा आँख हिंदुस्तान पर..

जो शहीद हो गए वो अमर कहलाये अक्सर उनकी कुरबानियों के आगे सदा नमन हमारा..

तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूँगा

नेताजी सुभाष चंद्र बोस

मैं मुस्लिम हूँ, तू हिन्दू है, है दोनों इंसान, ला मैं तेरी गीता पढ़ लूँ, तू पढ़ ले कुरान, इस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हैं मेरा बस एक ही अरमान एक थाली में खाना खाए सारा हिन्दुस्तान…

ये मत पूछो की वतन ने तुमको क्या दिया ? ये सोचो कि तुमने वतन के लिए क्या किया ?

चलो फिर से खुद को जागते हैं अनुशासन का डंडा फिर घुमाते हैं सुनहरा रंग है शहीदों के लहू से ऐसे शहीदों को हम सब सर झुकाते हैं

लहराएगा तिरंगा अब सारे आसमान पर भारत का ही नाम होगा सबकी जुबान पर ले लेंगे उसकी जान या खेलेंगे अपनी जान पर कोई जो उठाएगा आँख हिंदुस्तान पर..

जो शहीद हो गए वो अमर कहलाये अक्सर उनकी कुरबानियों के आगे सदा नमन हमारा..

तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूँगा

नेताजी सुभाष चंद्र बोस

मैं मुस्लिम हूँ, तू हिन्दू है, है दोनों इंसान, ला मैं तेरी गीता पढ़ लूँ, तू पढ़ ले कुरान, इस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हैं मेरा बस एक ही अरमान एक थाली में खाना खाए सारा हिन्दुस्तान…