लिपट कर बदन कई तिरंगे में आज भी आते हैं, यूँ ही नहीं दोस्तों हम ये पर्व मनाते हैं।
ना पूछो ज़माने से क्या हमारी कहानी है हमारी पहचान तो ये है कि हम हिंदुस्तानी हैं
सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा -मोहम्मद इकबाल
वंदे मातरम -बंकिम चंद्र चटर्जी
अब तक जिसका खून न खौला, वो खून नहीं वो पानी है जो देश के काम ना आये, वो बेकार जवानी है
जिस दिन रास्ते पर तिरंगा बैचने वाले बच्चे न दिखे उस दिन सोचना हम आज़ाद हो गये।
लिपट कर बदन कई तिरंगे में आज भी आते हैं, यूँ ही नहीं दोस्तों हम ये पर्व मनाते हैं।
ना पूछो ज़माने से क्या हमारी कहानी है हमारी पहचान तो ये है कि हम हिंदुस्तानी हैं
सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा -मोहम्मद इकबाल
वंदे मातरम -बंकिम चंद्र चटर्जी
अब तक जिसका खून न खौला, वो खून नहीं वो पानी है जो देश के काम ना आये, वो बेकार जवानी है
जिस दिन रास्ते पर तिरंगा बैचने वाले बच्चे न दिखे उस दिन सोचना हम आज़ाद हो गये।