किसी भी कीमत पर स्वतंत्रता का मोल नहीं किया जा सकता| वह जीवन है| भला जीने के लिए कोई क्या मोल नहीं चुकाएगा? –
जिस प्रकार पानी की एक बूंद समंदर में मिलकर अपनी पहचान खो देता है उस प्रकार इंसान जिस सोसाइटी में रहता है उसमे रहते हुए अपनी पहचान कभी नही खोता। इंसान की जिंदगी स्वतंत्र है। वह केवल अपने समाज के विकास के लिये पैदा नही हुआ बल्कि खुद का विकास करने के लिये पैदा हुआ है। B.R. Ambedkar
लिपट कर बदन कई तिरंगे में आज भी आते हैं, यूँ ही नहीं दोस्तों हम ये पर्व मनाते हैं।
कभी ठंड में ठिठुर कर देख लेना, कभी तपती धूप में जल के देख लेना, कैसे होती हैं हिफ़ाजत मुल्क की, कभी सरहद पर चल के देख लेना…
कुछ नशा तिरंगे की आन का हैं, कुछ नशा मातृभूमि की शान का हैं..
आजादी मिलती नहीं है बल्कि इसे छीनना पड़ता है सुभाष चंद्र बोस
किसी भी कीमत पर स्वतंत्रता का मोल नहीं किया जा सकता| वह जीवन है| भला जीने के लिए कोई क्या मोल नहीं चुकाएगा? –
जिस प्रकार पानी की एक बूंद समंदर में मिलकर अपनी पहचान खो देता है उस प्रकार इंसान जिस सोसाइटी में रहता है उसमे रहते हुए अपनी पहचान कभी नही खोता। इंसान की जिंदगी स्वतंत्र है। वह केवल अपने समाज के विकास के लिये पैदा नही हुआ बल्कि खुद का विकास करने के लिये पैदा हुआ है। B.R. Ambedkar
लिपट कर बदन कई तिरंगे में आज भी आते हैं, यूँ ही नहीं दोस्तों हम ये पर्व मनाते हैं।
कभी ठंड में ठिठुर कर देख लेना, कभी तपती धूप में जल के देख लेना, कैसे होती हैं हिफ़ाजत मुल्क की, कभी सरहद पर चल के देख लेना…
कुछ नशा तिरंगे की आन का हैं, कुछ नशा मातृभूमि की शान का हैं..
आजादी मिलती नहीं है बल्कि इसे छीनना पड़ता है सुभाष चंद्र बोस